अथर्ववेद के काण्ड - 6 के सूक्त 132 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 6/ सूक्त 132/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - अथर्वा देवता - स्मरः छन्दः - त्रिपदानुष्टुप् सूक्तम् - स्मर सूक्त
    पदार्थ -

    (देवाः) विजयी लोगों ने (अप्सु अन्तः) प्रजाओं के बीच (आध्या सह) ध्यान शक्ति के साथ (शोशुचानम्) अत्यन्त प्रकाशमान (यम्) जिस (स्मरम्) स्मरण सामर्थ्य को (असिञ्चन्) सींचा है, (तम्) उस [स्मरण सामर्थ्य] को (ते) तेरे लिये (वरुणस्य) सर्वश्रेष्ठ परमेश्वर के (धर्मणा) धर्म अर्थात् धारण सामर्थ्य से (तपामि) ऐश्वर्ययुक्त करता हूँ ॥१॥

    भावार्थ -

    मनुष्य विजयी शूरों का अनुकरण करके ध्यानपूर्वक स्मरण शक्ति बढ़ाकर ईश्वरनियम से ऐश्वर्य प्राप्त करें ॥१॥

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