अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 60/ मन्त्र 5
ऋषिः - ब्रह्मा
देवता - वास्तोष्पतिः, गृहसमूहः
छन्दः - अनुष्टुप्
सूक्तम् - रम्यगृह सूक्त
51
उप॑हूता इ॒ह गाव॒ उप॑हूता अजा॒वयः॑। अथो॒ अन्न॑स्य की॒लाल॒ उप॑हूतो गृ॒हेषु॑ नः ॥
स्वर सहित पद पाठउप॑ऽहूता: । इ॒ह । गाव॑: । उप॑ऽहूता: । अ॒ज॒ऽअ॒वय॑: । अथो॒ इति॑ । अन्न॑स्य । की॒लाल॑: । उप॑ऽहूत: । गृ॒हेषु॑ । न॒: ॥६२.५॥
स्वर रहित मन्त्र
उपहूता इह गाव उपहूता अजावयः। अथो अन्नस्य कीलाल उपहूतो गृहेषु नः ॥
स्वर रहित पद पाठउपऽहूता: । इह । गाव: । उपऽहूता: । अजऽअवय: । अथो इति । अन्नस्य । कीलाल: । उपऽहूत: । गृहेषु । न: ॥६२.५॥
भाष्य भाग
हिन्दी (4)
विषय
कुवचन के त्याग का उपदेश।
पदार्थ
(इह) यहाँ पर (नः) हमारे (गृहेषु) घरों में (गावः) गौएँ (उपहूताः) आदर से बुलायी गयीं, और (अजावयः) भेड़-बकरी (उपहूताः) पास में बुलायी गयीं होवें। (अथो) और भी (अन्नस्य) अन्न का (कीलालः) रसीला पदार्थ (उपहूतः) पास लाया गया हो ॥५॥
भावार्थ
मनुष्य दूधवाले गौ आदि पशु और भोजन के उत्तम पदार्थ संग्रह करके परस्पर रक्षा करें ॥५॥ यह मन्त्र यजुर्वेद में है−३।४३। और संस्कारविधि गृहाश्रमप्रकरण में भी आया है ॥
टिप्पणी
५−(उपहूताः) सत्कारेण समीपे वा प्राप्ताः (इह) गृहाश्रमे (गावः) गवादिदुग्धपशवः (उपहूताः) (अजावयः) अजाश्च अवयश्च (अथो) अपि (अन्नस्य) भोजनस्य (कीलालः) अ० ४।११।१०। सारपदार्थः (उपहूतः) (गृहेषु) गेहेषु (नः) अस्माकम् ॥
विषय
गौ, अजा, अवि वकीलाल अन्न
पदार्थ
१. (इह) = यहाँ घर में (गावः उपहुता:) = गौवों के लिए प्रार्थना की गई है। इसी प्रकार (अजावयः उपहताः) = भेड़ और बकरियों के लिए प्रार्थना की गई है (अथो) = और (अन्नस्य कीलाल:) = अन्न का सारभूत अंश, अर्थात् उत्कृष्ट सात्विक अन्न (न: गृहेषु) = हमारे घरों में (उपहत:) = प्रार्थित हुआ है।
भावार्थ
हमारे घरों में गौवें, भेड़ें, बकरियाँ हों तथा इन घरों में अन्न के सारभूत अंश की, पौष्टिक अन्न की कमी न हो।
भाषार्थ
(इह) इन [घरों में] (गावः उपहूताः) गौएं लाई गई हैं, (अजावयः) बकरियां और भेड़ें (उपहूतांः) लाई गई हैं, (अथो) तथा (अन्नस्य कीलालः) अन्न और अन्नों के विविध रस (नः गृहेषु) हमारे गृहों में (उपहूताः) लाए गए हैं।
टिप्पणी
[गृहपति गृहवासियों को कहता है कि तुम्हें किसी भी प्रकार से भय भीत न होना चाहिये। देखो, दूध के लिये गौएं, कृषि के लिये बैल, दूध के लिये बकरियां, ऊन के लिये भेड़ें, विविध अन्न और उनके पेयरस- सभी, कुछ हमारे घरों में विद्यमान है]।
विषय
गृह स्वामि और गृह-बन्धुओं के कर्त्तव्य।
भावार्थ
(इह) इस घर में (गावः) गौएं (उप-हूताः) लाई जावें, (अज-अवयः) बकरियां और भेड़ें भी (उप-हूताः) लाई जावें, (अथो) और (अन्नस्य) अन्न का (कीलालः) सारभूत अंश अर्थात् अन्नों में से भी उत्तम उत्तम बलकारी सारवान् अन्न (नः) हमारे (गृहेषु) घरों में (उप-हूतः) लाया जावे।
टिप्पणी
missing
ऋषि | देवता | छन्द | स्वर
ब्रह्मा ऋषिः। रम्या गृहाः वास्तोष्पतयश्च देवलः। पराऽनुष्टुभः। सप्तर्चं सूक्तम्॥
इंग्लिश (4)
Subject
Happy Home
Meaning
Let cows be happy and welcome here. Let sheep and goats be welcome and happy. The best and most delicious foods and drinks are brought in here in our homes.
Translation
I have found the cows in good condition and in good condition the goats and sheep have been brought to me. And the delicious foods abound in our home. (Also Yv. III.43)
Comments / Notes
MANTRA NO 7.62.5AS PER THE BOOK
Translation
Let the milch-cows be welcome to our houses, let there sheep’s and goats be welcome in our houses and let the essence of corn be always welcomed in them.
Translation
May we in this world get cows, goats, sheep and abundant food in our houses.
संस्कृत (1)
सूचना
कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।
टिप्पणीः
५−(उपहूताः) सत्कारेण समीपे वा प्राप्ताः (इह) गृहाश्रमे (गावः) गवादिदुग्धपशवः (उपहूताः) (अजावयः) अजाश्च अवयश्च (अथो) अपि (अन्नस्य) भोजनस्य (कीलालः) अ० ४।११।१०। सारपदार्थः (उपहूतः) (गृहेषु) गेहेषु (नः) अस्माकम् ॥
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