ऋग्वेद मण्डल - 2 के सूक्त 8 के मन्त्र
1 2 3 4 5 6

मन्त्र चुनें

  • ऋग्वेद का मुख्य पृष्ठ
  • ऋग्वेद - मण्डल 2/ सूक्त 8/ मन्त्र 1
    ऋषि: - गृत्समदः शौनकः देवता - अग्निः छन्दः - गायत्री स्वरः - षड्जः
    पदार्थ -

    हे (विद्वान्) ! (वाजयन्निव) पदार्थों को प्राप्त कराते हुए आप (मीढुषः) सींचनेवाले (यशस्तमस्य) अतीव यशस्वी वा बहुत जलयुक्त (अग्ने) अग्नि के समान प्रतापी जल के वा अग्नि के (योगान्) योगों की और (रथान्) विमानादि रथों की (नु) शीघ्र (उपस्तुहि) प्रशंसा कीजिये ॥१॥

    भावार्थ -

    इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे शिल्पी विद्वान् जन! आप जैसे घोड़ों और बैल आदि से चलनेवाले रथों को चलाते हैं, वैसे ही अति शीघ्र गति से जल के कलाघरों से प्रेरणा पाया अग्नि विमानादि यानों को शीघ्र चलाता है, यह सबके प्रति उपदेश करो ॥१॥

    अन्वय -

    हे विद्वन् वाजयन्निव त्वं मीढुषो यशस्तमस्याऽग्नेर्योगान् रथाँश्च नूपस्तुहि ॥१॥

    पदार्थ -

    (वाजयन्निव) यथा गमयन् (नु) शीघ्रम् (रथान्) रमणीयान् विमानादीन् (योगान्) (अग्नेः) पावकस्य (उप) (स्तुहि) प्रशंस (यशस्तमस्य) अतिशयेन यशस्विनो बहुजलयुक्तस्य वा (मीढुषः) सेचकस्य ॥१॥

    भावार्थ -

    अत्रोपमालङ्कारः। हे शिल्पिन् विद्वन् यथाऽश्वादयो रथान् गमयन्ति तथैवातिशीघ्रगत्या जलयन्त्रप्रेरितोऽग्निर्विमानादियानानि शीघ्रं गमयतीति सर्वान् प्रत्युपदिश ॥१॥

    Meanings -

    Scientist of eminence, would you like to drive your chariots fast and far? Then tap, appraise and exploit agni, fire, in various uses and experiments. It is immensely powerful, replete with wealth and liquid energy and a blessing for humanity. So is water.

    भावार्थ -

    भावार्थ - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. हे कारागिरांनो! तुम्ही जसे घोडे व बैल इत्यादींनी चालणाऱ्या रथांना चालविता तसे अति शीघ्र गतीने जलाच्या यंत्रांनी प्रेरित असलेला अग्नी विमान इत्यादी यानांना तात्काळ चालवितो. हा उपदेश सर्वांना करा. ॥ १ ॥

    कृपया कम से कम 20 शब्द लिखें!
    Top