Loading...
ऋग्वेद मण्डल - 8 के सूक्त 77 के मन्त्र
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11
मण्डल के आधार पर मन्त्र चुनें
अष्टक के आधार पर मन्त्र चुनें
  • ऋग्वेद का मुख्य पृष्ठ
  • ऋग्वेद - मण्डल 8/ सूक्त 77/ मन्त्र 1
    ऋषि: - कुरुसुतिः काण्वः देवता - इन्द्र: छन्दः - गायत्री स्वरः - षड्जः

    ज॒ज्ञा॒नो नु श॒तक्र॑तु॒र्वि पृ॑च्छ॒दिति॑ मा॒तर॑म् । क उ॒ग्राः के ह॑ शृण्विरे ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    ज॒ज्ञा॒नः । नु । श॒तऽक्र॑तुः । वि । पृ॒च्छ॒त् । इति॑ । मा॒तर॑म् । के । उ॒ग्राः । के । ह॒ । शृ॒ण्वि॒रे॒ ॥


    स्वर रहित मन्त्र

    जज्ञानो नु शतक्रतुर्वि पृच्छदिति मातरम् । क उग्राः के ह शृण्विरे ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    जज्ञानः । नु । शतऽक्रतुः । वि । पृच्छत् । इति । मातरम् । के । उग्राः । के । ह । शृण्विरे ॥ ८.७७.१

    ऋग्वेद - मण्डल » 8; सूक्त » 77; मन्त्र » 1
    अष्टक » 6; अध्याय » 5; वर्ग » 29; मन्त्र » 1
    Acknowledgment

    पदार्थ -
    जब राजा (जज्ञानः) अपने कर्म सदाचार और विद्या आदि सद्गुणों से सर्वत्र सुप्रसिद्ध हो और (नु) जब (शतक्रतुः) बहुत वीरकर्म करने योग्य हो, तब (मातरम्) व्यवस्थानिर्माणकर्त्री सभा से (इति) यह (पृच्छत्) जिज्ञासा करे कि हे सभे सभास्थ जनो ! (इह) इस लोक में (के+उग्राः) कौन राजा महाराज अपनी शक्ति से महान् गिने जाते हैं (के+ह+शृण्विरे) और कौन यश प्रताप आदि से सुने जाते हैं अर्थात् विख्यात हो रहे हैं ॥१ ॥

    भावार्थ - राजा को उचित है कि सभा के द्वारा देश के सम्पूर्ण वृत्तान्त और दशाएँ अवगत करे और अपने शत्रु-मित्र को पहिचाने ॥१ ॥


    Bhashya Acknowledgment

    पदार्थः -
    यदा राजा जज्ञानः=स्वकर्मणा सर्वत्र प्रसिद्धो भवेत् । पुनः शतक्रतुः=बहूनि च कर्माणि कर्तुं शक्नुयात् । तदा । मातरम्=व्यवस्थानिर्मात्रीं सभाम् । इति वक्ष्यमाणम् । पृच्छत्=पृच्छेत्=जिज्ञासेत् । हे सभे ! इह लोके । के जनाः । उग्राः=स्वकर्मणा महान्तः । के+ह=के च । शृण्विरे=प्रसिद्धतराः सन्तीति ॥१ ॥


    Bhashya Acknowledgment

    Meaning -
    Coming to the stage of self-knowledge and responsibility, let Indra, world ruler, ask the mother power: Who are the terrible ones? Who are the notorious ones?


    Bhashya Acknowledgment

    भावार्थ - राजाने सभेद्वारे देशाचा संपूर्ण वृतांत व दशा अवगत करून घ्यावी व आपले शत्रू आणि मित्र ओळखावे. ॥१॥


    Bhashya Acknowledgment
    Top