अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 132/ मन्त्र 8
ऋषिः -
देवता - प्रजापतिः
छन्दः - प्राजापत्या गायत्री
सूक्तम् - कुन्ताप सूक्त
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क ए॑षां॒ कर्क॑री लिखत् ॥
स्वर सहित पद पाठक: । ए॑षा॒म् । कर्क॑री । लिखत् ॥१३२.८॥
स्वर रहित मन्त्र
क एषां कर्करी लिखत् ॥
स्वर रहित पद पाठक: । एषाम् । कर्करी । लिखत् ॥१३२.८॥
भाष्य भाग
हिन्दी (4)
विषय
परमात्मा के गुणों का उपदेश।
पदार्थ
(कः) कौन (एषाम्) इनके बीच (कर्करी) कर्करी [झारी जलपात्र, वा जलतरंग आदि बाजा] लिखत्) छोड़े [बजावे] ॥८॥
भावार्थ
चुने हुए विद्वान् मनुष्य और विदुषी स्त्रियाँ संसार में उत्तम उत्तम बाजों के साथ वेद-विद्या का गान करके आत्मा और शरीर की बल बढ़ानेवाली चमत्कारी क्रियाओं का प्रकाश करें ॥८-१२॥
टिप्पणी
८−(कः) (एषाम्) मनुष्याणां मध्ये (कर्करी) अर्त्तिकमिभ्रमि०। उ० ३।१३२। सौत्रो धातुः, कर्क हासे-अरप्रत्ययः, यद्वा, कर्कं हासं राति, रा दाने-क, गौरादित्वात् ङीष्, विभक्तेर्लुक्। कर्करीम्। सनालजलपात्रम्। जलतरङ्गादिवाद्यम् (लिखत्) लिख अक्षरविन्यासे। अक्षरविन्यासरीत्या वादयेत् ॥
विषय
कर्करी विलेखन व दुन्दुभि हनन
पदार्थ
१. (एषाम्) = गतमन्त्र के अनुसार इन क्रियाशील प्राणसाधकों व उदारधर्म का पालन करनेवालों की (कर्करी) = क्रियाशीलताओं को (क:) = कौन (लिखत्) = अवदीर्ण-विनष्ट कर देता है? कौन इनकी क्रियाशीलताओं को उखाड़ फेंकता है? "कर्करी' शब्द द्विवचन में है। एक अभ्युदय-साधक क्रियाएँ हैं, दूसरी निःश्रेयस-साधक। कौन-सी शक्ति है जो इसकी इन क्रियाओं को विदीर्ण कर डालती है? २. (क:) = कौन-सी वह प्रबल शक्ति (एषाम्) = इन साधकों की (दुन्दुभिम्) = दुन्दुभि को अन्तर्नाद को-अन्त:स्थित प्रभु से दी जानेवाली प्रेरणा को-(हनत्) = नष्ट कर देती है। किसके वशीभूत होकर यह जीव उस प्रेरणा को नहीं सुनता। ३. (यदि) = यदि (इयम्) = यह देदीप्यमान रूपवाली प्रकृति (इनत्) = इन क्रियाओं व अन्तर्नाद को नष्ट करती है तो (कथं हनत्) = कैसे नष्ट करती है? जीव बड़े उत्तम मार्ग पर चल रहा होता है। न जाने क्या होता है कि उसकी सब क्रियाएँ विनष्ट हो जाती हैं और वह अन्त:स्थित प्रभु-प्रेरणा को सुननेवाला नहीं रहता।
भावार्थ
प्रकृति का चमकीला आवरण हमपर इसप्रकार आक्रामक हो जाता है कि हमारी सब शुभ क्रियाएँ समाप्त हो जाती हैं और हम उस अन्त:स्थित प्रभु की प्रेरणा को नहीं सुन पाते।
भाषार्थ
(कः) कौन है वह (कर्करी) पुनः-पुनः जगत् का कर्त्ता, जो कि (एषाम्) इन जीवात्माओं के कर्मों का (लिखत्) लेखा लिखता है?
विषय
missing
भावार्थ
(एषां) इनके बीच में (कः) कौन (कंकरिम्) उस ‘कर्करी’ के समान समस्त स्वरों के उत्पादक कर्त्ता रूप विजेता, राजा को (लिखत्) लिखता है, अर्थात् कौन उसको भीतर से खोखला करता और उसे तैयार करता है।
टिप्पणी
missing
ऋषि | देवता | छन्द | स्वर
missing
इंग्लिश (4)
Subject
Prajapati
Meaning
Who is the creator and sustainer who writes the karmic destiny of all these souls? It is Ka, the Supreme Brahma.
Translation
Who among these men do play flute?
Translation
Who among these men do play flute?
Translation
Which of these vital breath strikes internal chord?
संस्कृत (1)
सूचना
कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।
टिप्पणीः
८−(कः) (एषाम्) मनुष्याणां मध्ये (कर्करी) अर्त्तिकमिभ्रमि०। उ० ३।१३२। सौत्रो धातुः, कर्क हासे-अरप्रत्ययः, यद्वा, कर्कं हासं राति, रा दाने-क, गौरादित्वात् ङीष्, विभक्तेर्लुक्। कर्करीम्। सनालजलपात्रम्। जलतरङ्गादिवाद्यम् (लिखत्) लिख अक्षरविन्यासे। अक्षरविन्यासरीत्या वादयेत् ॥
बंगाली (2)
मन्त्र विषय
পরমাত্মগুণোপদেশঃ
भाषार्थ
(কঃ) কে (এষাম্) এর মধ্যে (কর্করী) কর্করী [ঝারি জলপাত্র, বা জলতরঙ্গ আদি বাদ্য] (লিখৎ) বিন্যাস করে/করবে [বাজাবে] ॥৮॥
भावार्थ
মনোনীত বিদ্বান পুরুষ এবং বিদুষী নারী জগতে উত্তম উত্তম বাদ্যের সহিত বেদ-বিদ্যা গান করে আত্মা এবং শরীরের বল বৃদ্ধিকারী বিবিধ ক্রিয়ার প্রকাশ করুক ॥৮-১২॥
भाषार्थ
(কঃ) কে তিনি (কর্করী) পুনঃ-পুনঃ জগতের কর্ত্তা, যিনি (এষাম্) এই জীবাত্মাদের কর্ম (লিখৎ) লেখেন?
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