अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 17/ मन्त्र 15
ऋषिः - मयोभूः
देवता - ब्रह्मजाया
छन्दः - अनुष्टुप्
सूक्तम् - ब्रह्मजाया सूक्त
57
नास्य॑ श्वे॒तः कृ॑ष्ण॒कर्णो॑ धु॒रि यु॒क्तो म॑हीयते। यस्मि॑न्रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या ॥
स्वर सहित पद पाठन । अ॒स्य॒ । श्वे॒त: । कृ॒ष्ण॒ऽकर्ण॑: । धु॒रि । यु॒क्त: । म॒ही॒य॒ते॒ । यस्मि॑न् । रा॒ष्ट्रे । नि॒ऽरु॒ध्यते॑ । ब्र॒ह्म॒ऽजा॒या । अचि॑त्त्या ॥१७.१५॥
स्वर रहित मन्त्र
नास्य श्वेतः कृष्णकर्णो धुरि युक्तो महीयते। यस्मिन्राष्ट्रे निरुध्यते ब्रह्मजायाचित्त्या ॥
स्वर रहित पद पाठन । अस्य । श्वेत: । कृष्णऽकर्ण: । धुरि । युक्त: । महीयते । यस्मिन् । राष्ट्रे । निऽरुध्यते । ब्रह्मऽजाया । अचित्त्या ॥१७.१५॥
भाष्य भाग
हिन्दी (4)
विषय
ब्रह्म विद्या का उपदेश।
पदार्थ
(अस्य) उसका (श्वेतः) श्वेत, (कृष्णकर्णः) श्यामकर्ण घोड़ा (धुरि) रथ के जूये में (युक्तः) जुता हुआ (न) नहीं (महीयते) बड़ाई पाता है। (यस्मिन् राष्ट्रे) जिस राज्य में.... ॥१५॥
भावार्थ
वेदविद्याहीन पुरुषों के पास उत्तम घोड़े आदि नहीं होते ॥१५॥
टिप्पणी
१५−(न) निषेधे (अस्य) (श्वेतः) शुक्लवर्णः (कृष्णकर्णः) श्यामकर्णोऽश्वः (धुरि) धुर्व हिंसायाम्−क्विप्। यानमुखे (युक्तः) युगं गतः (महीयते) महीङ् पूजायाम्। पूज्यते स्तूयते ॥
विषय
वेदत्याग व मूर्ख अनादृत राजा
पदार्थ
१. (यस्मिन् राष्ट्र) = जिस राष्ट्र में (अचित्या) = नासमझी से (ब्रह्मजाया) = प्रभु से प्रादुर्भूत की गई यह वेदवाणी (निरुध्यते) = निरुद्ध की जाती है, अर्थात् जहाँ ज्ञान के प्रसार पर बल नहीं दिया जाता, वहाँ (अस्य) = इस राष्ट्र-रथ का (क्षत्ता) = सारथि (निष्कग्रीव:) = सुवर्णवत् दीस ज्ञान के कण्ठहारवाला (सूनानाम्) = ज्ञान-रश्मियों के [सूना-Aray of light ] (अग्रत: न ऐति) = आगे नहीं चलता, अर्थात् ज्ञान का प्रसार न होने पर राष्ट्र का सारथि भी ज्ञानी नहीं रहता और मूर्ख राजा राष्ट्र-रथ को लक्ष्य से दूर ले-जाता है। २. इसीप्रकार जिस राष्ट्र में नासमझी से वेदवाणी के प्रसार का निरोध होता है, (अस्य) = इस राष्ट्र का (श्वेत:) = श्वेत, अर्थात् शुद्ध आचरणवाला (कृष्णकर्ण:) = आकृष्ट किये हैं कर्ण जिसने, अर्थात् जिसकी आज्ञा को सब प्रजा सुनती है, ऐसा (धुरियुक्त:) = राष्ट्र-शकट के जुए में जुता हुआ राजा (न महीयते) = उत्तम महिमा को प्राप्त नहीं होता, अर्थात् इस राष्ट्र में राजा भी मलिन कर्मोंवाला तथा प्रजा से उपेक्षित व अनादृत होता है।
भावार्थ
ज्ञान के प्रचार के अभाव में राष्ट्र में राजा भी ज्ञानी नहीं रहता और अन्तत: मलिन कौवाला व प्रजा से उपेक्षित व अनादृत हो जाता है।
भाषार्थ
(श्वेतः) सुफेद (कृष्णकर्णः) और काले कानोंवाला [अश्व ] (अस्य) इस [ राजा ] के (धुरि) रथ की धुरी में (युक्तः) जुता हुआ (न महीयते) नहीं महिमा प्राप्त करता, शोभायमान नहीं होता (यस्मिन् राष्ट्रे) जिस राष्ट्र में (ब्रह्मजाया) ब्रह्मजाया ( अचित्त्या) अज्ञान-पूर्वक, (निरुध्यते) [प्रचार करने से] रोकी जाती है।
विषय
ब्रह्मजाया या ब्रह्मशक्ति का वर्णन।
भावार्थ
(यस्मिन् राष्ट्रे अचित्या ब्रह्म-जाया निरुध्यते) जिस राष्ट्र में मूर्खता से, ब्राह्मण विद्वान् पुरुषों की (जाया) व्यवस्था को रोक दिया जाता है उस राष्ट्र के (अस्य) राजा का (श्वेतः) श्वेत (कृष्णकर्णः) श्यामकर्ण घोड़ा (धुरि युक्तः) अपने उचित स्थान पर नियुक्त होकर (न महीयते) महत्व को प्राप्त नहीं होता। अर्थात् उस राष्ट्र में राजा का भी, प्रजा द्वारा, उचित मान तथा सरकार नहीं होता।
टिप्पणी
missing
ऋषि | देवता | छन्द | स्वर
मयोभूर्ऋषिः। ब्रह्मजाया देवताः। १-६ त्रिष्टुभः। ७-१८ अनुष्टुभः। अष्टादशर्चं सूक्तम्॥
इंग्लिश (4)
Subject
Brahma-Jaya: Divine Word
Meaning
Nor does the brilliant beam of the nation’s chariot with shade of rich green all round the helm and steer of the Rashtra meet with any recognition of its grandeur, if in that nation the Word of divinity and voice of the Brahmana is suppressed by error and ignorance.
Translation
Not his black-eared white horse shows off when harnessed to the chariot, in whose domain an intellectual’s wife is detained thoughtlessly.
Translation
No black-eared white horce of such a dominion where in the wife of Brahmana is detained through want of Sense moves proudly harnessed in the yoke of car.
Translation
In a country where the spread of Vedic knowledge is prohibited through lack of sense, no black eared courser, white of hue, moves proudly, harnessed to his car.
Footnote
A country which does not follow the instructions of the Vedas, does not produce excellent horses.
संस्कृत (1)
सूचना
कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।
टिप्पणीः
१५−(न) निषेधे (अस्य) (श्वेतः) शुक्लवर्णः (कृष्णकर्णः) श्यामकर्णोऽश्वः (धुरि) धुर्व हिंसायाम्−क्विप्। यानमुखे (युक्तः) युगं गतः (महीयते) महीङ् पूजायाम्। पूज्यते स्तूयते ॥
हिंगलिश (1)
Subject
Effects of lack of our sensibilities towards women
Word Meaning
By not being able to mount the horses in their chariots - to perform Aswamedh yagna - That nation/state loses face and influence in the world, where females are exploited, commandeered/forced upon against their free will & the nation/society becomes deaf /ignorant to the voice of the people.
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