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अथर्ववेद के काण्ड - 5 के सूक्त 17 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 17/ मन्त्र 16
    ऋषिः - मयोभूः देवता - ब्रह्मजाया छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - ब्रह्मजाया सूक्त
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    नास्य॒ क्षेत्रे॑ पुष्क॒रिणी॑ ना॒ण्डीकं॑ जायते॒ बिस॑म्। यस्मि॑न्रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    न । अ॒स्य॒ । क्षेत्रे॑ । पु॒ष्क॒रिणी॑ । न । आ॒ण्डीक॑म् । जा॒य॒ते॒ । बिस॑म् । यस्मि॑न् । रा॒ष्ट्रे । नि॒ऽरु॒ध्यते॑ । ब्र॒ह्म॒ऽजा॒या । अचि॑त्त्या ॥१७.१६॥


    स्वर रहित मन्त्र

    नास्य क्षेत्रे पुष्करिणी नाण्डीकं जायते बिसम्। यस्मिन्राष्ट्रे निरुध्यते ब्रह्मजायाचित्त्या ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    न । अस्य । क्षेत्रे । पुष्करिणी । न । आण्डीकम् । जायते । बिसम् । यस्मिन् । राष्ट्रे । निऽरुध्यते । ब्रह्मऽजाया । अचित्त्या ॥१७.१६॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 5; सूक्त » 17; मन्त्र » 16
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    ब्रह्म विद्या का उपदेश।

    पदार्थ

    (अस्य) उसके (क्षेत्रे) खेत में (न)(पुष्करिणी) पोषणवती शक्ति, और (न)(आण्डीकम्) प्राप्ति योग्य और (बिसम्) बलदायक वस्तु (जायते) होती है (यस्मिन् राष्ट्रे) जिस राज्य में.... ॥१६॥

    भावार्थ

    वेदविद्या के विना न खेती विद्या और न व्यापार विद्या प्रवृत्त होती है ॥१६॥

    टिप्पणी

    १६−(न) (अस्य) (क्षेत्रे) शस्योत्पत्तिस्थाने (पुष्करिणी) अ० ४।३४।५। पुष पुष्टौ−करन्। पुष्करं पोषणमस्त्यत्र, पुष्कर−इनि। पोषणवती शक्तिः (न) निषेधे (आण्डीकम्) ञमन्ताड् डः। उ० १।११४। इति अम गतौ−ड। अण्ड−ईकञ्। प्राप्तियोग्यम्। (जायते) उत्पद्यते (बिसम्) अ० ४।३४।५। बलकरं वस्तु ॥

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    विषय

    मद्यशाला नकि पुष्करिणी

    पदार्थ

    १. (यस्मिन् राष्ट्र) = जिस राष्ट्र में (अचित्या) = नासमझी के कारण (बह्मजाया निरुध्यते) = प्रभु से प्रादुर्भूत की गई यह वेदवाणी रोकी जाती है, (अस्य क्षेत्रे) = इस राष्ट्र के खेतों में (पुष्करिणी) = कमलोंवाले तलाब (न जायते) = नहीं होते तथा (आण्डीकं बिसम्) = बीजों से युक्त भिस व कमलकन्द नहीं होते, अर्थात् इस राष्ट्र में कमल आदि का उत्पादन न होकर तम्बाकू आदि की खेती होने लगती है। २. इसीप्रकार जिस राष्ट्र में वेदज्ञान के प्रसार की व्यवस्था नहीं होती, उस राष्ट्र के राजा के लिए (पश्नि न विदुहन्ति) = इस वेदवाणी का-ज्ञान-रश्मियों के सम्पर्कवाले ग्रन्थों का दोहन वे लोग नहीं करते (ये) = जोकि (अस्या) = इसके (दोहम्) = दुग्ध का (उपासते) = उपासन करते हैं, अर्थात् ज्ञानी पुरुष इस राजा को ज्ञान देने के लिए यत्नशील नहीं होते। राजा ज्ञान की रुचिवाला न होने से ज्ञान का पात्र ही नहीं रहता।

    भावार्थ

    जिस राष्ट्र में ज्ञान का प्रसार नहीं होगा, वहाँ लोग पुष्करिणियों के निर्माण के स्थान में मद्यशालाओं का निर्माण करेंगे, कमलों का स्थान तम्बाकू ले-लेगा। राजा ज्ञानियों से घिरा हुआ होने के स्थान में खुशमदियों में घिरा हुआ होगा।

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    भाषार्थ

    (न)(अस्य) इस राजा के (क्षेत्रे) खेत में (पुष्करिणी) कमलों से भरा जलह्रद, (न)(आण्डीकम् ) कमलफूल, ( न विसम् ) न खाद्य-भिस (जायते) पैदा होता है, (यस्मिन् राष्ट्रे) जिस राष्ट्र में (ब्रह्मजाया) ब्रह्मजाया ( अचित्त्या) अज्ञान-पूर्वक, (निरुध्यते) [प्रचार करने से] रोकी जाती है।

    टिप्पणी

    [पुष्करिणी=पुष्कर अर्थात् कमलों से भरा जलह्रद। आण्डीकम् = कमलफूल जिसमें कि कमलडोडे लगे रहते हैं। बिसम् = कमल की जड़, जिसे अग्निपरिपक्व कर खाया जाता है, जिसे कि 'भिस' या 'भे' कहते हैं।]

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    विषय

    ब्रह्मजाया या ब्रह्मशक्ति का वर्णन।

    भावार्थ

    जिस राष्ट्र में सच्चे ब्राह्मणों की व्यवस्था को मूर्खतावश रोक दिया जाता है (अस्य क्षेत्रे) उस राष्ट्र के राजा के क्षेत्र में (पुष्करिणी) पुखरिनी, (आण्डीकं) बड़ा कमल और (बिसम्) भिस आदि कमलकन्द भी (न जायते) उत्पन्न नहीं होते। अर्थात् उस देश में राष्ट्र के शोभाजनक ताल सरोवर तथा धन-सम्पत् भी सुरक्षित नहीं रह सकते।

    टिप्पणी

    missing

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    मयोभूर्ऋषिः। ब्रह्मजाया देवताः। १-६ त्रिष्टुभः। ७-१८ अनुष्टुभः। अष्टादशर्चं सूक्तम्॥

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Brahma-Jaya: Divine Word

    Meaning

    No greenery waves in the field, no lotus blooms in the lake, the fruit forsakes the tree, and the shoot withers on the branch in the Rashtra in which the Word of Divinity and the Brahmana’s voice is suppressed on account of error, ignorance, arrogance and pride.

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    Translation

    Not in his land is a lotus-pond, nor the lotus-seeds as large as an egg grow, in whose domain an intellectual's wife is detained thoughtlessly.

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    Translation

    No lotus-pool is in the field and there no lily grows with oval bulb in the region of the dominion where in the wife of Brahmana is detained through want of sense.

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    Translation

    In a country where the spread of Vedic knowledge is prohibited through lack of sense, no lily grows with oval bulbs, no lotus pool is found in its field.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    १६−(न) (अस्य) (क्षेत्रे) शस्योत्पत्तिस्थाने (पुष्करिणी) अ० ४।३४।५। पुष पुष्टौ−करन्। पुष्करं पोषणमस्त्यत्र, पुष्कर−इनि। पोषणवती शक्तिः (न) निषेधे (आण्डीकम्) ञमन्ताड् डः। उ० १।११४। इति अम गतौ−ड। अण्ड−ईकञ्। प्राप्तियोग्यम्। (जायते) उत्पद्यते (बिसम्) अ० ४।३४।५। बलकरं वस्तु ॥

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    हिंगलिश (1)

    Subject

    Effects of lack of our sensibilities towards women

    Word Meaning

    Water bodies do not sport lotus flowers and the lotus flowers do not bear seeds to propagate themselves, - The environment suffers, where females are commandeered/forced upon against their free will.

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