अथर्ववेद के काण्ड - 8 के सूक्त 8 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 8/ सूक्त 8/ पर्यायः 0/ मन्त्र 1
    ऋषि: - भृग्वङ्गिराः देवता - परसेनाहननम्, इन्द्रः, वनस्पतिः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - शत्रुपराजय सूक्त
    पदार्थ -

    (मन्थिता) मथन करनेवाला, (शक्रः) शक्तिमान् (शूरः) शूर, (पुरन्दरः) गढ़ तोड़नेवाला, (इन्द्रः) इन्द्र [महाप्रतापी राजा] (मन्थतु) मथन करे। (यथा) जिससे (अमित्राणाम्) वैरियों की (सेनाः) सेनाएँ (सहस्रशः) सहस्र-सहस्र करके (हनाम) हम मारें ॥१॥

    भावार्थ -

    ऐश्वर्यवान् राजा के पुरुषार्थ से उसके सेना-दल बहुत शत्रुओं का नाश करें ॥१॥

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