अथर्ववेद - काण्ड 20/ सूक्त 132/ मन्त्र 9
सूक्त -
देवता - प्रजापतिः
छन्दः - प्राजापत्या गायत्री
सूक्तम् - कुन्ताप सूक्त
क ए॑षां दु॒न्दुभिं॑ हनत् ॥
स्वर सहित पद पाठक: । एषाम् । दु॒न्दुभि॑म् । हनत् ॥१३२.९॥
स्वर रहित मन्त्र
क एषां दुन्दुभिं हनत् ॥
स्वर रहित पद पाठक: । एषाम् । दुन्दुभिम् । हनत् ॥१३२.९॥
अथर्ववेद - काण्ड » 20; सूक्त » 132; मन्त्र » 9
विषय - missing
भावार्थ -
(एषाम्) इनके बीच में से (दुन्दुभिम्) द्वन्द युद्ध में शोभा पाने वाले, अथवा शत्रुनाशक इस प्रबल राजा को (कः) कौन (हनत्) मारने में समर्थ है।
टिप्पणी -
missing
ऋषि | देवता | छन्द | स्वर - missing
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