Loading...
अथर्ववेद के काण्ड - 20 के सूक्त 57 के मन्त्र
मन्त्र चुनें
  • अथर्ववेद का मुख्य पृष्ठ
  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 57/ मन्त्र 12
    ऋषिः - मेध्यातिथिः देवता - इन्द्रः छन्दः - बृहती सूक्तम् - सूक्त-५७
    34

    दा॒ना मृ॒गो न वा॑र॒णः पु॑रु॒त्रा च॒रथं॑ दधे। नकि॑ष्ट्वा॒ नि य॑म॒दा सु॒ते ग॑मो म॒हांश्च॑र॒स्योज॑सा ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    दा॒ना । मृग: । न । वा॒र॒ण: । पु॒रु॒ऽत्रा । च॒रथ॑म् । द॒धे॒ ॥ नकि॑: । त्वा॒ । नि । य॒म॒त् । आ । सु॒ते । ग॒म॒: । म॒हान् । च॒र॒सि॒ । ओज॑सा ॥५७.१२॥


    स्वर रहित मन्त्र

    दाना मृगो न वारणः पुरुत्रा चरथं दधे। नकिष्ट्वा नि यमदा सुते गमो महांश्चरस्योजसा ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    दाना । मृग: । न । वारण: । पुरुऽत्रा । चरथम् । दधे ॥ नकि: । त्वा । नि । यमत् । आ । सुते । गम: । महान् । चरसि । ओजसा ॥५७.१२॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 20; सूक्त » 57; मन्त्र » 12
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    ११-१३ सेनापति के लक्षणों का उपदेश।

    पदार्थ

    (न) जैसे (मृगः) जंगली (वारणः) हाथी (दाना) मद के कारण (पुरुत्रा) बहुत प्रकार से (चरथम्) झपट (दधे) लगाता है। [वैसे ही] (नकि) कोई नहीं (त्वा) तुझे (नि यमत्) रोक सकता, (सुते) तत्त्वरस को (आ गमः) तू प्राप्त हो, (महान्) महान् होकर तू (ओजसा) बल के साथ (चरसि) विचरता है ॥१२॥

    भावार्थ

    जैसे वन का मदमत्त हाथी सब ओर बे-रोक घूमकर उपद्रव मचाता है, वैसे ही नीतिज्ञ सेनापति तत्त्व विचारकर शत्रुओं को शीघ्र दबावे ॥१२॥

    टिप्पणी

    ११-१३ एते मन्त्रा व्याख्याताः-अ० २०।३।१-३ ॥

    इस भाष्य को एडिट करें

    विषय

    देखो व्याख्या अथर्व० २०.५३.१-३

    इस भाष्य को एडिट करें

    भाषार्थ

    देखो—२०.५३.२।

    इस भाष्य को एडिट करें

    विषय

    ईश्वरस्तुति।

    भावार्थ

    (११–१३) इन तीन मन्त्रों की व्याख्या देखो अथर्व का०२०। ५३। १–३॥

    टिप्पणी

    missing

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    मधुच्छन्दा ऋषिः। इन्द्रो देवता। १-३ गायत्र्यः। शेषाः पूर्वोक्ताः। षोडशचं सूक्तम्॥

    इस भाष्य को एडिट करें

    इंग्लिश (4)

    Subject

    Indra Devata

    Meaning

    Indra is generously giving, preventive, counter¬ active and invincible like a lion, and holds and rules the world of immense variety in motion. O lord of grandeur and majesty, as you move around everywhere by your might and lustre, pray come, bless our yajna and taste the soma of our creation. No one can restrain you, no one counter your will.

    इस भाष्य को एडिट करें

    Translation

    The Almighty God like wild elephant which mad with heat rushes on hither and thither, pervades the world unchecked O lord, none in this world can check and bind you. You great one with your power pervade all and give persistence to all.

    इस भाष्य को एडिट करें

    Translation

    The Almighty God like wild elephant which mad with heat rushes on hither and thither, pervades the world unchecked. O ford, none in this world can check and bind you. You great one with your power pervade all and give persistence to all.

    इस भाष्य को एडिट करें

    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    ११-१३ एते मन्त्रा व्याख्याताः-अ० २०।३।१-३ ॥

    इस भाष्य को एडिट करें

    बंगाली (2)

    मन्त्र विषय

    ১১-১৩ সেনানীলক্ষণোপদেশঃ

    भाषार्थ

    (ন) যেরূপে (মৃগঃ) বন্য (বারণঃ) হাতি (দানা) মদমত্ত হওয়ার কারণে (পুরুত্রা) বহু প্রকারে (চরথম্) উপদ্রব (দধে) ধারণ করে [তেমনই] (নকিঃ) এমন কেউ নেই যে (ত্বা) তোমাকে (নি যমৎ) প্রতিহত/প্রতিরোধ করতে পারে, (সুতে) তত্ত্ব রস (আ গমঃ) তুমি প্রাপ্ত হও, (মহান্) মহান্ হয়ে তুমি (ওজসা) বলসম্পন্ন হয়ে (চরসি) বিচরণ করো ॥১২॥

    भावार्थ

    যেমন বনের উন্মত্ত হাতি চতুর্দিকে ঘুরে ঘুরে বনে উপদ্রব করে, তেমনই নীতিজ্ঞ সেনাপতি তত্ত্ব বিচারপূর্বক শত্রুদের শীঘ্র দমন করুক॥১২॥

    इस भाष्य को एडिट करें

    भाषार्थ

    দেখো—২০.৫৩.২।

    इस भाष्य को एडिट करें
    Top