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अथर्ववेद के काण्ड - 20 के सूक्त 127 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 127/ मन्त्र 13
    ऋषिः - देवता - प्रजापतिरिन्द्रो वा छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - कुन्ताप सूक्त
    106

    नेमा इ॑न्द्र॒ गावो॑ रिष॒न्मो आ॒सां गोप॑ रीरिषत्। मासा॑म॒मित्र॒युर्ज॑न॒ इन्द्र॒ मा स्ते॒न ई॑शत ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    न । इमा: । इ॑न्द्र॒ । गाव॑: । रिष॒न् । मो इति॑ । आ॒साम् । गोप॑ । रीरिषत् ॥ मा । आसा॑म् । अमि॒त्र॒यु: । जन॒: । इन्द्र॒ । मा । स्ते॒न: । ईश॑त ॥१२७.१३॥


    स्वर रहित मन्त्र

    नेमा इन्द्र गावो रिषन्मो आसां गोप रीरिषत्। मासाममित्रयुर्जन इन्द्र मा स्तेन ईशत ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    न । इमा: । इन्द्र । गाव: । रिषन् । मो इति । आसाम् । गोप । रीरिषत् ॥ मा । आसाम् । अमित्रयु: । जन: । इन्द्र । मा । स्तेन: । ईशत ॥१२७.१३॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 20; सूक्त » 127; मन्त्र » 13
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    राजा के धर्म का उपदेश।

    पदार्थ

    (इन्द्र) हे इन्द्र ! [बड़े ऐश्वर्यवाले राजन्] (इमाः) यह (गावः) भूमियें (न रिषन्) न नष्ट होवें और (आसाम्) इनका (गोप) रक्षक (मो रीरिषत्) नहीं नष्ट होवे। (इन्द्र) हे इन्द्र ! [राजन्] (मा) न तो (अमित्रयुः) वैरियों को चाहनेवाला (जनः) नीच मनुष्य, और (मा)(स्तेनः) चोर (आसाम्) इन [भूमियों] का (ईशत) राजा होवे ॥१३॥

    भावार्थ

    राजा डाकू चोर आदि से खेती आदि भूमियों की रक्षा करके प्रजा को पाले ॥१३॥

    टिप्पणी

    १३−(न) निषेधे (इमाः) दृश्यमानाः (इन्द्र) परमैश्वर्यवन् राजन् (गावः) कृष्यादिभूमयः (रिषन्) नश्यन्तु (मो) निषेधे (आसाम्) गवां भूमीनाम् (गोप) गुपू रक्षणे-अच्। आयादय आर्धधातुके वा। पा० ३।१।३१। आयलोपः। विभक्तेर्लुक्। गोपः। रक्षकः (रीरिषन्) रिष हिंसायाम्, ण्यन्ताद् माङि लुङि चङि रूपं कर्मण्यर्थे। नश्येत् (मा) निषेधे (आसाम्) (अमित्रयुः) अमित्र-क्यच्, उप्रत्ययः। शत्रून् कामयमानः (जनः) पामरलोकः (इन्द्र) (मा) (स्तेनः) चोरः (ईशत्) राजा भवेत् ॥

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    विषय

    न अमित्रयु जन, न स्तेन

    पदार्थ

    १. हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो! (इमाः गाव:) = ये हमारे घरों की गौएँ (न रिषन्) = हिंसित न हों और (मा उ) = मत ही निश्चय से (आसाम्) = इन गौओं का (गोप:) = ग्वाला [रक्षक] (रीरिषत्) = हिंसित हो। २. हे (इन्द्र) = शत्रुविद्रावक प्रभो! (अमित्रयुः जनः) = शत्रुरूप से वर्तनेवाला- इनके साथ स्नेह न करनेवाला मनुष्य (आसाम्) = इनका (मा ईशत) = शासक मत हो जाए। इसीप्रकार (स्तेन:) = चोर (मा) [ईशत] = मत शासक हो।

    भावार्थ

    हमारे घरों व राष्ट्र में न गौएँ हिंसित हों-न गोप। शत्रुभूत मनुष्य व चोर इनका ईश न जो जाए।

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    भाषार्थ

    (इन्द्र) हे परमेश्वर! आप द्वारा शासित राष्ट्र में (इमा गावः) ये गौएँ (न रिषन्) हिंसित न हों, (उ) और (आसाम्) इन गौओं का (गोपः) गोपति भी (मा रीरिषत्) न हिंसित हो। (आसाम्) इन गौओं के साथ (अमित्रयुः) अमित्रता चाहनेवाला (जनः) जन (मा ईशत) इनका स्वामी न बने, (इन्द्र) हे परमेश्वर! (स्तेनः) चोर इनका (ईशत मा) अधीश्वर न बने।

    टिप्पणी

    [मन्त्र में परमेश्वर-शासित राष्ट्र का वर्णन है।]

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    विषय

    राजा को विद्वान् का आदेश और समृद्ध प्रजाएं।

    भावार्थ

    हे (इन्द्र) इन्द्र ! ऐश्वर्यवन् ! (इमाः गावः) ये गौवें (मा रिषन्) पीड़ित न हों। (आसां गोपतिः) इनका गोपति, स्वामी मी (मा रिषत्) पीड़ित न हो। हे (इन्द्र) राजन् (आसाम्) इनपर (अमित्रसुः) शत्रु रूप से वर्तने वाला, इनसे स्नेह का व्यवहार न करने वाला (मा ईशत) स्वामी न हो। (स्तेनः मा ईशत) चोर डाकू स्वभाव का पुरुष भी इनका स्वामी न हो।

    टिप्पणी

    ‘नेमा’ इति शं० पा०।

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    अथ चतस्यः कारव्याः। अनुष्टुभः॥

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Indra

    Meaning

    Hey Indra, lord ruler of the world, let not the cows, lands and culture suffer here, nor let their master and protector suffer any harm. Let no thief, let no enemy rule over there.

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    Translation

    O mighty ruler, let the cows remain here safe, let not the master of cows face ruins, and let not hostile-hearted on the robber have his rule and control over them.

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    Translation

    O mighty ruler, let the cows remain here safe, let not the master of cows face ruins, and: let not: hestile-heanted on the robber have his rule and control over them.

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    Translation

    The learned Persons make him their foremost leader, who is fit to carry out the affairs of the assembly, expert in war and councils, creative administrator, good organizer, brave and courageous, brilliant like the sun and destroyer of the wicked and violent enemy.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    १३−(न) निषेधे (इमाः) दृश्यमानाः (इन्द्र) परमैश्वर्यवन् राजन् (गावः) कृष्यादिभूमयः (रिषन्) नश्यन्तु (मो) निषेधे (आसाम्) गवां भूमीनाम् (गोप) गुपू रक्षणे-अच्। आयादय आर्धधातुके वा। पा० ३।१।३१। आयलोपः। विभक्तेर्लुक्। गोपः। रक्षकः (रीरिषन्) रिष हिंसायाम्, ण्यन्ताद् माङि लुङि चङि रूपं कर्मण्यर्थे। नश्येत् (मा) निषेधे (आसाम्) (अमित्रयुः) अमित्र-क्यच्, उप्रत्ययः। शत्रून् कामयमानः (जनः) पामरलोकः (इन्द्र) (मा) (स्तेनः) चोरः (ईशत्) राजा भवेत् ॥

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    बंगाली (2)

    मन्त्र विषय

    রাজধর্মোপদেশঃ

    भाषार्थ

    (ইন্দ্র) হে ইন্দ্র! [পরম্ ঐশ্বর্যবান্ রাজন্] (ইমাঃ) এই (গাবঃ) ভূমিসমূহ (ন রিষন্) না নষ্ট হোক এবং (আসাম্) এই ভূমি-সমূহের (গোপ) রক্ষক (মো রীরিষৎ) বিনষ্ট না হোক। (ইন্দ্র) হে ইন্দ্র! [রাজা] (মা) না (অমিত্রয়ুঃ) শত্রুতা কামনাকারী (জনঃ) নীচ মনুষ্য, এবং (মা) না (স্তেনঃ) চোর (আসাম্) এই [ভূমিসমূহের] (ঈশত) রাজা হোক ॥১৩॥

    भावार्थ

    রাজা ডাকাত চোর আদি হতে কৃষিক্ষেত্র আদি ভূমি রক্ষা করুক এবং প্রজাপালন করুক ॥১৩॥

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    भाषार्थ

    (ইন্দ্র) হে পরমেশ্বর! আপনার দ্বারা শাসিত রাষ্ট্রে (ইমা গাবঃ) এই গাভী (ন রিষন্) হিংসিত না হোক, (উ) এবং (আসাম্) এই গাভীদের (গোপঃ) গোপতিও (মা রীরিষৎ) না হিংসিত হোক। (আসাম্) এই গাভীদের সাথে (অমিত্রয়ুঃ) অমিত্রতা কামনাকারী (জনঃ) জন/মনুষ্যগণ (মা ঈশত) এদের স্বামী যেন না হয়, (ইন্দ্র) হে পরমেশ্বর! (স্তেনঃ) চোর এদের (ঈশত মা) অধীশ্বর যেন না হয়।

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