अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 127/ मन्त्र 9
ऋषिः -
देवता - प्रजापतिरिन्द्रो वा
छन्दः - अनुष्टुप्
सूक्तम् - कुन्ताप सूक्त
142
क॑त॒रत्त॒ आ ह॑राणि॒ दधि॒ मन्थां॒ परि॒ श्रुत॑म्। जा॒याः पतिं॒ वि पृ॑च्छति रा॒ष्ट्रे राज्ञः॑ परि॒क्षितः॑ ॥
स्वर सहित पद पाठक॒त॒रत् । ते॒ । आ । ह॑राणि॒ । दधि॒ । मन्था॑म् । परि॒ । श्रु॒त॑म् ॥ जा॒या: । पति॒म् । वि । पृ॑च्छति । रा॒ष्ट्रे । राज्ञ॑: । परि॒क्षित॑: ॥१२७.९॥
स्वर रहित मन्त्र
कतरत्त आ हराणि दधि मन्थां परि श्रुतम्। जायाः पतिं वि पृच्छति राष्ट्रे राज्ञः परिक्षितः ॥
स्वर रहित पद पाठकतरत् । ते । आ । हराणि । दधि । मन्थाम् । परि । श्रुतम् ॥ जाया: । पतिम् । वि । पृच्छति । राष्ट्रे । राज्ञ: । परिक्षित: ॥१२७.९॥
भाष्य भाग
हिन्दी (4)
विषय
राजा के धर्म का उपदेश।
पदार्थ
(कतरत्) कौन वस्तु (ते) तेरे लिये (परि) सुधारकर (आ हराणि) मैं लाऊँ, (दधि) दही, (मन्थाम्) निर्जल मठा, [वा] (श्रुतम्) नोनी माखन आदि−[यह वात] (जायाः) पत्नी (पतिम्) पति से (परिक्षितः) सब प्रकार ऐश्वर्यवाले (राज्ञः) राजा के (राष्ट्रे) राज्य में (वि) विविध प्रकार (पृच्छति) पूछती है ॥९॥
भावार्थ
सुनीतिवाले राजा के राज्य में दूध, दही, घृत आदि पदार्थ बहुतायत से पाकर लोग सुखी होते हैं ॥९॥
टिप्पणी
९−(कतरत्) किं वस्तु (ते) तुभ्यम् (आ हराणि) आनयानि (दधि) (मन्थाम्) मथ्यते विलोड्यते, मन्थ विलोडने-घञ्, टाप्। मथितम्। निर्जलतक्रम् (परि) परिभूष्य (श्रुतम्) स्रु गतौ क्षरणे च-क्त, सस्य शः। स्रुतम्। क्षरितं नवनीतादिकम् (जायाः) एकवचनस्य बहुवचनम्। पत्नी (पतिम्) भर्तारम् (वि) विविधम् (पृच्छति) ज्ञातुमिच्छति (राष्ट्रे) राज्ये (राज्ञः) शासकस्य (परीक्षितः) म० ७। सर्वत ऐश्वर्ययुक्तस्य ॥
विषय
दधि, मन्थां, परिश्रुतम्
पदार्थ
१. (परिक्षितः) = चारों ओर निवास व गति करनेवाले (राज्ञः) = संसार के शासक [इन्द्रो विश्वस्य राजति] प्रभु के राष्ट्र में, अर्थात् जिस राष्ट्र में सब घरों में प्रभु-स्तवन होता है वहाँ (जाया) = पत्नी (पतिं विपृच्छति) = पति से पूछती है कि (दधि मन्थां परिश्रुतम्) = दही, मठा व मक्खन में से (कतरत्) = कौन-सी वस्तु को (ते) = आपके लिए (आहराणि) = प्राप्त कराऊँ? २. प्रभु-स्तवनवाले राष्ट्र में [दूध] दही-मक्खन-मठा आदि सात्त्विक भोजनों का ही प्रयोग होता है। वहाँ मद्य, मांस आदि के सेवन की रुचि नहीं पनपती। मद्य आदि का सेवन मनुष्य को प्रभु-स्तवन से दूर ले जाता है।
भावार्थ
प्रभु-स्तवन के साथ मनुष्य सात्विक भोजनों की ही वृत्तिवाला बना रहता है। राजस् व तामस भोजन हमें प्राकृतिक भोगों में फंसाकर प्रभु-स्तवन से दूर कर देते हैं।
भाषार्थ
(परिक्षितः) सर्वत्रवासी सर्वगत, (राज्ञः) जगत् के महाराजा परमेश्वर के (राष्ट्रे) ऐसे उत्तम राज्य में, (जायाः) पत्नियाँ (पतिम्) अपने-अपने पति से (वि पृच्छति) विशेषतया पूछती हैं कि हे पति! (कतरत्) कौनसी वस्तु मैं सेवार्थ (ते) आपके लिए (आ हराणि) लाऊँ, (परिश्रुतम्) प्रसिद्ध (दधि मन्थाम्) दधि या मठ?
टिप्पणी
[जिस राष्ट्र में महात्माओं के सदुपदेश होते रहते हैं, वह राष्ट्र, मानुष शासित राष्ट्र न होता हुआ परमेश्वर द्वारा शासित राष्ट्र बन जाता है, जिसमें कि पति-पत्नी का पारस्परिक व्यवहार प्रेममय रहता है। परमेश्वर के नियमों द्वारा शासित राष्ट्र की एक झांकी महाभारत में इस प्रकार मिलती है। यथा— न राज्यं न च राजासीत्, न दण्डो न च दाण्डिकः। धर्मेणैव प्रजाः सर्वाः, वर्तन्ते स्म परस्परम्॥ अर्थात् सत्ययुग में न कोई राज्य था, और न कोई राजा। न दण्डव्यवस्था थी, और न कोई दण्ड देनेवाला न्यायाधीश। उस समय प्रजाजन धर्मपूर्वक ही परस्पर वर्ताव करते थे। ऐसा राष्ट्र मानो परमेश्वरशासित राष्ट्र है। पृच्छति=पृच्छन्ति। या जाया पृच्छति।]
विषय
उत्तम राजा का स्वरूप ‘परिक्षित्’।
भावार्थ
(परिक्षितः राज्ञः) प्रजा के उत्तम रीति से बसाने हारे, उत्तम रक्षक राजा के (राष्ट्रे) राष्ट्र में (जाया) स्त्री, प्रजा (पतिम) पति को (वि पृच्छति) विविध प्रकार के प्रश्न पूछती है कि (दधि) दही, ऐश्वर्य, (मन्थम्) मठा, मथनबल और (परिचुस्त्रुतम्) सब और से प्राप्त मखन या श्री इनमें से (ते) तेरे लिये (कतरत्) क्या पदार्थ (आहराणि) ला उपस्थित करूं ?
टिप्पणी
(द्वि०) ‘परिश्रुतम्’ जायाः ‘मन्था’ इति शं० पा०।
ऋषि | देवता | छन्द | स्वर
अथ चतस्रः पारिक्षित्यः।
इंग्लिश (4)
Subject
Indra
Meaning
What shall I bring for you? Curds, buttermilk or barley meal stirred in milk, or the famous soma juice? This does every wife ask and offer her husband in happy dominion of the universal ruler, present and ruling everywhere.
Translation
In the realm of the luminous fire or year (Parikshit) the wife her husband as whatsoever curds, gruel of milk, or other milk preparation, or butter she should bring for him.
Translation
In the realm of the luminous fire or year (Parikshit) the wife her husband as whatsoever curds, gruel of milk, or other milk preparation, or butter she should bring for him.
Translation
The powerful and wealthy king alerts the energetic man of actions, “stand to, roam about instructing all people, Go on working under me alone, who am strong and terrible. Let even the enemy, too, nourish and protect thee”.
संस्कृत (1)
सूचना
कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।
टिप्पणीः
९−(कतरत्) किं वस्तु (ते) तुभ्यम् (आ हराणि) आनयानि (दधि) (मन्थाम्) मथ्यते विलोड्यते, मन्थ विलोडने-घञ्, टाप्। मथितम्। निर्जलतक्रम् (परि) परिभूष्य (श्रुतम्) स्रु गतौ क्षरणे च-क्त, सस्य शः। स्रुतम्। क्षरितं नवनीतादिकम् (जायाः) एकवचनस्य बहुवचनम्। पत्नी (पतिम्) भर्तारम् (वि) विविधम् (पृच्छति) ज्ञातुमिच्छति (राष्ट्रे) राज्ये (राज्ञः) शासकस्य (परीक्षितः) म० ७। सर्वत ऐश्वर्ययुक्तस्य ॥
बंगाली (2)
मन्त्र विषय
রাজধর্মোপদেশঃ
भाषार्थ
(কতরৎ) কোন বস্তু (তে) তোমার জন্য (পরি) সুশোভিত করে (আ হরাণি) আমি আনয়ন করবো/আনবো, (দধি) দই, (মন্থাম্) নির্জল মাঠা, [বা] (শ্রুতম্) মাখন আদি−[এই কথা] (জায়াঃ) পত্নী (পতিম্) পতিকে (পরিক্ষিতঃ) সর্ব প্রকার ঐশ্বর্য্যযুক্ত (রাজ্ঞঃ) রাজার (রাষ্ট্রে) রাজ্যে (বি) বিবিধ প্রকারে (পৃচ্ছতি) জিজ্ঞাসা করে॥৯॥
भावार्थ
সুনীতিবান রাজার রাজ্যে দুধ, দই, ঘৃত আদি পদার্থ বেশি বেশি প্রাপ্ত করে মনুষ্য সুখী হোক॥৯॥
भाषार्थ
(পরিক্ষিতঃ) সর্বত্রবাসী সর্বগত, (রাজ্ঞঃ) জগতের মহারাজা পরমেশ্বরের (রাষ্ট্রে) এরূপ উত্তম রাজ্যে, (জায়াঃ) পত্নীগণ (পতিম্) নিজ-নিজ পতির প্রতি (বি পৃচ্ছতি) বিশেষভাবে প্রশ্ন করে হে পতি! (কতরৎ) কোন বস্তু আমি সেবার্থে (তে) আপনার জন্য (আ হরাণি) আনয়ন করবো, (পরিশ্রুতম্) প্রসিদ্ধ (দধি মন্থাম্) দধি নাকি মাঠা?
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