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अथर्ववेद के काण्ड - 11 के सूक्त 8 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 8/ मन्त्र 14
    ऋषिः - कौरुपथिः देवता - अध्यात्मम्, मन्युः छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - अध्यात्म सूक्त
    71

    ऊ॒रू पादा॑वष्ठी॒वन्तौ॒ शिरो॒ हस्ता॒वथो॒ मुख॑म्। पृ॒ष्टीर्ब॑र्जह्ये पा॒र्श्वे कस्तत्सम॑दधा॒दृषिः॑ ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    ऊ॒रू इति॑ । पादौ॑ । अ॒ष्ठी॒वन्तौ॑ । शिर॑: । हस्तौ॑ । अथो॒ इति॑ । मुख॑म् । पृ॒ष्टी: । ब॒र्ज॒ह्ये॒३॑ इति॑ । पा॒र्श्वे इति॑ । क: । तत् । सम् । अ॒द॒धा॒त् । ऋषि॑: ॥१०.१४॥


    स्वर रहित मन्त्र

    ऊरू पादावष्ठीवन्तौ शिरो हस्तावथो मुखम्। पृष्टीर्बर्जह्ये पार्श्वे कस्तत्समदधादृषिः ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    ऊरू इति । पादौ । अष्ठीवन्तौ । शिर: । हस्तौ । अथो इति । मुखम् । पृष्टी: । बर्जह्ये३ इति । पार्श्वे इति । क: । तत् । सम् । अदधात् । ऋषि: ॥१०.१४॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 11; सूक्त » 8; मन्त्र » 14
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    सब जगत् के कारण परमात्मा का उपदेश।

    पदार्थ

    (ऊरू) दोनों जंघाओं, (अष्ठीवन्तौ) दोनों घुटनों, (पाद) दोनों पैरों, (हस्तौ) दोनों हाथों, (अथो) और भी (शिरः) शिर, (मुखम्) मुख, (पृष्ठीः) पसलियों, (बर्जह्ये) दोनों कुच की टीपनी, (पार्श्वे) दोनों कोखों को (तत्) तब (कः) किस (ऋषिः) ऋषि [ज्ञानवान्] ने (सम् अदधात्) मिला दिया ॥१४॥

    भावार्थ

    शरीर के भीतर जंघा आदि को किस चतुर ज्ञानी ने आपस में जोड़कर जमा दिया है। इसका उत्तर अगले मन्त्र में है ॥१४॥

    टिप्पणी

    १४−(ऊरू) जानूपरिभागौ (पादौ) (अष्ठीवन्तौ) अ० २।२३।५। ऊरुपादयोर्मध्यस्थे जानुनी (शिरः) मस्तकम् (हस्तौ) (अथो) अपि च (मुखम्) (पृष्ठीः) अ० २।७।५। पर्श्वस्थीनि (बर्जह्ये) बल जीवने-विच्, लस्य रः+जनेर्यक्। उ० ४।१११। ओहाक् त्यागे-यक्। जहातेर्द्वे च। उ० २।४। इति श्रवणाद् द्वित्वम्। कुचाग्रभागौ (पार्श्वे) अ० २।३३।३। कक्षयोरधोभागौ (कः) प्रश्ने (समदधात्) संहितवान् संश्लिष्टवान् (ऋषिः) अ० २।६।१। ज्ञानवान् ॥

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    विषय

    कः ऋषिः?

    पदार्थ

    १. (ऊरू) = जाँघों को, (अष्ठीवन्तौ) = जानुओं को, (शिर:) = सिर को, (पादौ) = पाँवों को, (इस्तौ) = हाथों को (अथो मुखम) = और मुख को (पृष्ठी:) = पाश्र्वास्थियों-पसलियों को, (बर्जह्यो)= हंसली की हड़ियों को, (पार्श्वो) = छाती की पसलियों को (तत्) = उस सब ढाँचे को (क: ऋषि:) = किस सर्वद्रष्टा विवेकी ने (समदधात्) = परस्पर जोड़ा।

    भावार्थ

    ऊरू आदि अवयवों को कौन तत्वद्गष्टा संहित करनेवाला है?

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    भाषार्थ

    (उरू) दो उरुओं, (पादौ) दो पांवों, (अष्ठीवन्तौ) दो घुटनों, (शिरो हस्तौ) सिर और हाथों, (अथो) तथा (मुखम्) मुख को, (पृष्टीः) पसलियों को, (बर्जह्ये) दो कन्धों या हंसलियों को, (पार्श्वे) दो कोखों को (कः ऋषिः) किस ऋषि ने (तत्) वह सब (समदधात्) जोड़ दिया।

    टिप्पणी

    [उरू = Thighs, इस का अनुवाद प्रायः जंघाएं किया जाता है। अथर्व० १९।६०।२ में "ऊर्वोरोजो जङ्घयोर्जवः" में ऊरू और जंघाएं पृथक्-पृथक् पठित हैं। मन्त्र में ऋषिपद द्वारा उत्तर भी दे दिया है कि "कः ऋषिः” अर्थात् "प्रजापति ऋषि" ने ये जोड़ जोड़े हैं। कः = प्रजापतिः। यथा 'को वै नाम प्रजापतिः' (ऐ० ३।२१)]।

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    विषय

    मन्यु रूप परमेश्वर का वर्णन।

    भावार्थ

    (कः ऋषिः) वह कौन सर्वद्रष्टा विवेकी है जो (ऊरू) जांघों को, (अष्ठीवन्तौ पादौ) जानुओं वाले चरणों को, (शिरः हस्तौ) सिर और हाथों को (अथो मुखम्) और मुख को (पृष्टीः) पीठ के मोहरों और (बर्जह्ये) हंसली की हड्डियों और (पार्श्वे) छाती की पसुलियों के दोनों भागों आदि (तत्) इस सब ढांचे को (सम् अदधात्) भली प्रकार परस्पर जोड़ता हैं ?

    टिप्पणी

    ‘पृष्ठीर्मज्जह्ये’ इति पैप्प० सं०।

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    कौरुपथिर्ऋषिः। अध्यात्मं मन्युर्देवता। १-३२, ३४ अनुष्टुभः, ३३ पथ्यापंक्तिः। चतुश्चत्वारिंशदृचं सूक्तम्॥

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Constitution of Man

    Meaning

    Who is the visionary sage who joined together thighs, knees and legs and feet, head, hands and mouth? Who fixed together the back and ribs, the collar bone and the sides? Who is that?

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    Translation

    Thighs, feet, knee-joints, head, hands, also face, ribs, nipples (? barjahya), sides: what seer put that together ?

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    Translation

    What is that most brilliant power which joins together, the things, the feet the knee bones, the head, the mouth and both the hands the ribs, the back-joints and the sides.

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    Translation

    Who is the wise sage who hath constructed the thighs, the feet, the knee-bones, the head, both the hands, the face, the ribs, the nipples, and both the sides?

    Footnote

    Answer to this question is given in the next verse.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    १४−(ऊरू) जानूपरिभागौ (पादौ) (अष्ठीवन्तौ) अ० २।२३।५। ऊरुपादयोर्मध्यस्थे जानुनी (शिरः) मस्तकम् (हस्तौ) (अथो) अपि च (मुखम्) (पृष्ठीः) अ० २।७।५। पर्श्वस्थीनि (बर्जह्ये) बल जीवने-विच्, लस्य रः+जनेर्यक्। उ० ४।१११। ओहाक् त्यागे-यक्। जहातेर्द्वे च। उ० २।४। इति श्रवणाद् द्वित्वम्। कुचाग्रभागौ (पार्श्वे) अ० २।३३।३। कक्षयोरधोभागौ (कः) प्रश्ने (समदधात्) संहितवान् संश्लिष्टवान् (ऋषिः) अ० २।६।१। ज्ञानवान् ॥

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