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अथर्ववेद के काण्ड - 9 के सूक्त 7 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 7/ मन्त्र 8
    ऋषिः - ब्रह्मा देवता - गौः छन्दः - आसुरी गायत्री सूक्तम् - गौ सूक्त
    47

    इ॑न्द्रा॒णी भ॒सद्वा॒युः पुच्छं॒ पव॑मानो॒ बालाः॑ ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    इ॒न्द्रा॒णी । भ॒सत् । वा॒यु: । पुच्छ॑म् । पव॑मान: । बाला॑: ॥१२.८॥


    स्वर रहित मन्त्र

    इन्द्राणी भसद्वायुः पुच्छं पवमानो बालाः ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    इन्द्राणी । भसत् । वायु: । पुच्छम् । पवमान: । बाला: ॥१२.८॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 9; सूक्त » 7; मन्त्र » 8
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    सृष्टि की धारणविद्या का उपदेश।

    पदार्थ

    [सृष्टि में] (इन्द्राणी) इन्द्राणी [इन्द्र की पत्नी, सूर्य की धूप] (भसत्) कटिभाग, (वायुः) वायु (पुच्छम्) प्रसन्नता का साधन [वा पीछे का भाग] (पवमानः) शोधक पदार्थ [अग्नि जल आदि] (बालाः) [बालों अर्थात् केशों के समान आकारवाली] झाड़ुओं [कूर्चियों के समान हैं] ॥८॥

    भावार्थ

    मन्त्र ७ के समान है ॥८॥

    टिप्पणी

    ८−(इन्द्राणी) अ० १।२७।४। इन्द्रस्य पत्नी। सूर्यदीप्तिः (भसत्) अ० ४।१४।८। कटिभागः (पुच्छम्) पुच्छ प्रसादे-अच्, इति शब्दकल्पद्रुमः। प्रसन्नताकारणम्। पश्चाद्भागः (पवमानः) अ० ३।३१।२। संशोधकपदार्थः (बालाः) बाल-अर्शआद्यच्, टाप्। बालाः केशाकाराः अवयवाः सन्ति यासां ताः। कूर्च्यः ॥

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    विषय

    मित्र से प्रजा तक

    पदार्थ

    १.(मित्र: च वरुणः च) = मित्र और वरुण (अंसौ) = कन्धे हैं, (त्वष्टा च अर्यमा च) = त्वष्टा और अर्यमा (दोषणी) = भुजाओं के ऊपर के भाग हैं, (महादेवः बाहः) = महादेव बाहु हैं [अगली टाँगों का पिछला भाग], (इन्द्राणी) = विद्युत्-शक्ति (भसत्) = गुह्यभाग है, (वायुः पुच्छम्) = वायु पूंछ है, (पवमानः बाला:) = बहता हुआ वायु उसके बाल हैं। २. (ब्रह्म च क्षत्रं च) = ब्रह्म और क्षत्र [ब्राह्मण और क्षत्रिय] (श्रोणी) = उसके श्रोणीप्रदेश [कुल्हे] हैं, (बलम्) = बल [सेना] (ऊरू) = जाँचे हैं। (धाता च सविता च) = धाता और सविता उसके (अष्ठीवन्तौ) = टखने हैं, (गन्धर्वाः जंघा:) = गन्धर्व जंघाएँ हैं (अप्सरस:) = रूपवती स्त्रियाँ [अप्सराएँ] (कुष्ठिका:) = खुरों के ऊपर-पीछे की ओर लगी अंगुलियाँ हैं, (अदितिः) = पृथिवी (शफा:) = खुर हैं। ३. (चेत:) = चेतना (हृदयम्) = हृदय है, (मेधा) = बुद्धि (यकृत्) = जिगर है, (व्रत पुरीतत्) = व्रत उसकी अति है, (क्षुत् कुक्षि:) = भूख कोख है, (इरा) = अन्न व जल (वनिष्टुः) = गुदा व बड़ी आँतें हैं, (पर्वता:) = पर्वत व मेघ (प्लाशय:) = छोटी आंत हैं, (क्रोध:) = क्रोध वृक्को -गुर्दे हैं, (मन्यु:) = शोक व दीप्ति (आण्डौ) = अण्डकोश हैं, (प्रजा शेप:) = प्रजाएँ उसका लिंगभाग हैं [वृक्की पुष्टिकरी प्रोक्तौ जठरस्थस्य मेदसः । वीर्यवाहिशिराधारौ वृषणौ पौरुषावहौ। गर्भाधानकर लिङ्गमयन वीर्यमूत्रयोः-शार्ङ्गधर]।

    भावार्थ

    वेद में मित्र, वरुण से लेकर क्रोध, मन्यु, प्रजा आदि का सुचारुरूपेण प्रतिपादन है।

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    भाषार्थ

    इन्द्राणी है जघनप्रदेश [भसद्१], वायु है पूंछ बहती, वायु (पवमानः) है बाल [पूंछ२ के], पवमानः= गच्छन् वायुः (अथर्व० ६।१९।१ सायण)

    टिप्पणी

    [(१) पौर्णमासी के सायंकाल पूर्व में तो पूर्ण चन्द्रमा, और पश्चिम में सूर्य, एक दूसरे के सामने, दो क्षितिजों पर होते हैं, मानो ये उठे हुए भूमि के दो स्कन्धरूप है। सूक्त में विश्व और गौ में तादात्म्य का वर्णन है। (२) पूंछ के हिलते ही पूंछ के बाल हिलते हैं। मच्छर के निवारण के लिये।]

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    विषय

    विश्वका गोरूप से वर्णन॥

    भावार्थ

    (इन्द्राणी) विद्युत् की शक्ति (असत्) गुह्य भाग है, (वायुः पुच्छं) वायु पुच्छ भाग है, (पवमानः वालाः) बहता हुआ वायु उसके बाल हैं।

    टिप्पणी

    missing

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    ब्रह्मा ऋषिः। गोदेवता। १ आर्ची उष्णिक्, ३, ५, अनुष्टुभौ, ४, १४, १५, १६ साम्न्यौ बृहत्या, ६,८ आसुयौं गायत्र्यौ। ७ त्रिपदा पिपीलिकमध्या निचृदगायत्री। ९, १३ साम्न्यौ गायत्रौ। १० पुर उष्णिक्। ११, १२,१७,२५, साम्नयुष्णिहः। १८, २२, एकपदे आसुरीजगत्यौ। १९ आसुरी पंक्तिः। २० याजुषी जगती। २१ आसुरी अनुष्टुप्। २३ आसुरी बृहती, २४ भुरिग् बृहती। २६ साम्नी त्रिष्टुप्। इह अनुक्तपादा द्विपदा। षड्विंशर्चं एक पर्यायसूक्तम्॥

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Cow: the Cosmic Metaphor

    Meaning

    Indrani, energy, is the hips, wind is the tail, waves and currents are the hair.

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    Translation

    Indrani (the strength of the resplendent self) is his hinder part; the wind (vayu) is his tail (puccha); the pressed out (pavamanah) soma juice is his hair (valah).

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    Translation

    Indrani is like its hinder part, Vayu like the tail and Pavaman like the hair.

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    Translation

    Lightning is the hinder parts, Air the tail, the purifying substances like fire and air the hair.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    ८−(इन्द्राणी) अ० १।२७।४। इन्द्रस्य पत्नी। सूर्यदीप्तिः (भसत्) अ० ४।१४।८। कटिभागः (पुच्छम्) पुच्छ प्रसादे-अच्, इति शब्दकल्पद्रुमः। प्रसन्नताकारणम्। पश्चाद्भागः (पवमानः) अ० ३।३१।२। संशोधकपदार्थः (बालाः) बाल-अर्शआद्यच्, टाप्। बालाः केशाकाराः अवयवाः सन्ति यासां ताः। कूर्च्यः ॥

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