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अथर्ववेद के काण्ड - 10 के सूक्त 9 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 9/ मन्त्र 18
    ऋषिः - अथर्वा देवता - शतौदना (गौः) छन्दः - अनुष्टुप् सूक्तम् - शतौदनागौ सूक्त
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    यत्ते॑ म॒ज्जा यदस्थि॒ यन्मां॒सं यच्च॒ लोहि॑तम्। आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    यत् । ते॒ । म॒ज्जा । यत् । अस्थि॑ । यत् । मां॒सम् । यत् । च॒ । लोहि॑तम् । अ॒मिक्षा॑म् । दु॒ह्र॒ता॒म् । दा॒त्रे । क्षी॒रम् । स॒र्पि:। अथो॒ इति॑ । मधु॑ ॥९.१८॥


    स्वर रहित मन्त्र

    यत्ते मज्जा यदस्थि यन्मांसं यच्च लोहितम्। आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    यत् । ते । मज्जा । यत् । अस्थि । यत् । मांसम् । यत् । च । लोहितम् । अमिक्षाम् । दुह्रताम् । दात्रे । क्षीरम् । सर्पि:। अथो इति । मधु ॥९.१८॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 10; सूक्त » 9; मन्त्र » 18
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    वेदवाणी की महिमा का उपदेश।

    पदार्थ

    (यत्) जो (ते) तेरी (मज्जा) मज्जा [हड्डी की मींग] (यत्) जो (अस्थि) हड्डी, (यत्) जो (मांसम्) मांस (च) और (यत्) जो (लोहितम्) रक्त है, वे सब (आमिक्षाम्) आमिक्षा.... मन्त्र १३ ॥१८॥

    भावार्थ

    मन्त्र १३ के समान है ॥१८॥

    टिप्पणी

    १८−(मज्जा) अ० १।११।४। छान्दसो दीर्घः। अस्थिमध्यस्थस्नेहः। अन्यत् स्पष्टम् ॥

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    विषय

    वेदज्ञान व सात्विक अन्न

    पदार्थ

    १. (यत् ते मज्जा) = जो तेरी मज्जा [अस्थि की मींग] है, (यत् अस्थि) = जो हडी है, (यत् मांसम्) = जो मांस है (यत् च लोहितम्) = और जो रुधिर है। (यौ ते बाहू) = जो तेरी भुजाएँ हैं, (ये दोषणी) = जो भुजा के उपरले भाग हैं, (यौ अंसौ) = जो कन्धे है, (या च ते ककुत्) = और जो तेरा कुहान है। (या: ते ग्रीवा:) = जो तेरी गर्दन की हड्डियाँ हैं, (ये स्कन्धा:) = जो तेरे कन्धों की हड्डियाँ हैं, (याः पृष्टी:) = जो पीठ की हड्डियाँ हैं, (याः च पशर्व:) = और जो पसलियाँ हैं। (यौ ते उरू) = जो तेरी जाँचे हैं, (अष्ठीवन्तौ) = जो घुटने हैं, (ये श्रोणी) = जो कूल्हे हैं, (या च ते भसत) = जो तेरा पेड़ है, (यत् ते पुच्छम्) = जो तेरी पूँछ है, (ये ते बाला:) = जो तेरे बाल हैं, (यत् ऊध:) = जो तेरा दुग्धाशय है, (ये च ते स्तना:) = और जो तेरे स्तन हैं। (याः ते जंघा:) = जो तेरी जाँचे है, (याः कुष्ठिका:) = जो कुष्टिकाएँ हैं-खुट्टियाँ हैं [The mouth or openings], छिद्र हैं, (ऋच्छरा:) = खुट्टों के ऊपर के भाग [कलाइयाँ] है, (ये च ते शफा:) = और जो तेरे खुर हैं। हे (शतौदने) = शतवर्षपर्यन्त हमारे जीवनों को आनन्दसिक्त करनेवाली वेदधेनो! (यत् ते चर्म) = जो तेरा चाम है और है (अघ्न्ये) = अहन्तव्ये वेदधेनो! (यानि लोमानि) = जो तेरे लोम हैं। २. ये सब, अर्थात् सब लोक-लोकान्तरों का ज्ञान (दात्रे) = तेरे प्रति अपने को दे डालनेवाले के लिए (आमिक्षाम्) = श्रीखण्ड को, (क्षीरम्) = दूध को, (सर्पिः) = घृत को (अथो मधु) = और मधु को दहताम्-प्रपूरित करें।

    भावार्थ

    वेदधेनु के ज्ञानदुग्ध का पान करते हुए हम 'आमिक्षा, क्षीर, सर्पि व मधु' जैसे उत्तम पदार्थों का ही प्रयोग करनेवाले बनते हैं।

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    भाषार्थ

    जो तेरी मज्जा, जो अस्थि, जो मांस, और जो लोहित [रक्त] है, वे दाता के लिये आमिक्षा, क्षीर, सर्पिः और मधु (दुह्रताम्) दोहन करें, प्रदान करें।

    टिप्पणी

    [मज्जा= Marrow, नालिका वाली हड्डियों में का गुद्दा। दाता= पारमेश्वरी माता का दर्शन करा देने वाला। मज्जा= निवनम् (अथर्व० ९।१२।(७)।१८)। लोहितम्= रक्षांसि (अथर्व० ९।१२(७)।१७)। ये व्रह्माण्ड-गौ के अवयव या अङ्ग हैं।]

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    विषय

    ‘शतौदना’ नाम प्रजापति की शक्ति का वर्णन।

    भावार्थ

    (यत् ते मज्जा) जो तेरी मज्जा है, (यत् अस्थि) जो हड्डी है, (यत् मांसम्) जो मांस है, (यत् च लोहितम्) और जो तेरा रुधिर है,

    टिप्पणी

    ‘या न्यस्थीनि’ इति पैप्प० सं०।

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    अथर्वा ऋषिः। मन्त्रोक्ता शतोदना देवता। १ त्रिष्टुप्, २- ११, १३-२४ अनुष्टुभः, १२ पथ्यापंक्तिः, २५ द्व्युष्णिग्गर्भा अनुष्टुप्, २६ पञ्चपदा बृहत्यनुष्टुप् उष्णिग्गर्भा जगती, २७ पञ्चपदा अतिजगत्यनुष्टुब् गर्भा शक्वरी। सप्तविंशत्यृचं सूक्तम्॥

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Shataudana Cow

    Meaning

    Let your marrow, your bone, your flesh, your blood yield curd and cheese, milk, ghrta, and the honey sweets of life’s nourishments for the generous giver.

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    Translation

    May your this marrow (majja), this bone (asthi), this flesh (mansa) and this blood (lohita), yield to your donor mingled curd, milk, melted butter and honey as well.

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    Translation

    Let the marrow of it, let the bones of it, let the flesh of it and let the blood of it pour Amiksha and sweet milk for the giver.

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    Translation

    Let all thy marrow, every bone, let all thy flesh, and all thy blood, grant for a charitably disposed person, curd, milk, butter and the knowledge of God.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    १८−(मज्जा) अ० १।११।४। छान्दसो दीर्घः। अस्थिमध्यस्थस्नेहः। अन्यत् स्पष्टम् ॥

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