अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 4/ मन्त्र 7
ऋषिः - गरुत्मान्
देवता - तक्षकः
छन्दः - अनुष्टुप्
सूक्तम् - सर्पविषदूरीकरण सूक्त
43
इ॒दं पै॒द्वो अ॑जायते॒दम॑स्य प॒राय॑णम्। इ॒मान्यर्व॑तः प॒दाहि॒घ्न्यो वा॒जिनी॑वतः ॥
स्वर सहित पद पाठइ॒दम् । पै॒द्व: । अ॒जा॒य॒त॒ । इ॒दम् । अ॒स्य॒ । प॒रा॒ऽअय॑नम् । इ॒मानि॑ । अर्व॑त: । प॒दा । अ॒हि॒ऽघ्न्य: । वा॒जिनी॑ऽवत: ॥४.७॥
स्वर रहित मन्त्र
इदं पैद्वो अजायतेदमस्य परायणम्। इमान्यर्वतः पदाहिघ्न्यो वाजिनीवतः ॥
स्वर रहित पद पाठइदम् । पैद्व: । अजायत । इदम् । अस्य । पराऽअयनम् । इमानि । अर्वत: । पदा । अहिऽघ्न्य: । वाजिनीऽवत: ॥४.७॥
भाष्य भाग
हिन्दी (4)
विषय
सर्प रूप दोषों के नाश का उपदेश।
पदार्थ
(इदम्) अब (पैद्वः) शीघ्रगामी पुरुष (अजायत) प्रकट हुआ है, (इदम्) यह (अस्य) इसका (परायणम्) पराक्रम का मार्ग है। (अर्वतः) शीघ्रगामी (अहिघ्न्यः) महाहिंसक [साँपों] के मारनेवाले (वाजिनीवतः) अन्नयुक्त क्रियावाले [पुरुष] के (इमानि) यह (पदा) पदचिह्न हैं ॥७॥
भावार्थ
पूर्वज महात्माओं के चरित्रों पर चलकर मनुष्य आगे बढ़े ॥७॥
टिप्पणी
७−(इदम्) इदानीम् (पैद्वः) म० ५। शीघ्रगामी (अजायत) प्रादुरभवत् (इदम्) (अस्य) पुरुषस्य (परायणम्) परा पराक्रमयुक्तम् अयनं मार्गः (इमानि) (अर्वतः) अ० ६।९२।२। ऋ गतौ-वनिप्। शीघ्रगामिनः। विज्ञानिनः (पदा) पदचिह्नानि (अहिघ्न्यः) अघ्न्यादयश्च। उ० ४।११२। अहि+हन हिंसागत्योः-यक्। सुपां सुलुक्०। पा० ७।१।३९। षष्ठ्याः सुः। अहिघ्न्यस्य महाहिंसकस्य सर्पस्य नाशकस्य (वाजिनीवतः) अ० ४।३८।६। अन्नवतीक्रियायुक्तस्य ॥
विषय
अर्व:, अहिज्य, वाजिनीवान्
पदार्थ
१. (इदम्) = [इदानीम्] अब (पैद्वः) यह गतिशील पुरुष (अजायत) = प्रादुर्भूत शक्तियोंवाला होता है [जनी प्रादुर्भाव]।(इदम् अस्य परायणम्) = इसका यह उत्कृष्ट मार्ग है [पर+अयनम्]।(इमानि पदा) = इसके ये पग उस व्यक्ति के पग हैं जोकि (अर्वत:) = वासनाओं का संहारक है [अर्व 10 kill] (अहिघ्न्यः) = [षष्ठया: सुः] विनाशक तत्त्वों को नष्ट करनेवाला है और (वाजिनीवतः) = शक्तियुक्त है|
भावार्थ
हम गतिशील बनकर अपनी शक्तियों का विकास करें, उत्कृष्ट मार्ग पर चलें, वासनाओं का संहार करें, हिंसक तत्त्वों को नष्ट करें तथा शक्तियुक्त बनें।
भाषार्थ
(इदम्) इस भूस्थल में (पैद्वः अजायत) पैद्व होता है, (इदम्) यह [जलाशय] (अस्य) इस का (परायणम्) दूसरा आने जाने का स्थान है। (इमानि) ये (पदा = पदानि) पैर हैं (अर्वतः) शीघ्रगामी, (वाजिनीवतः) शक्तिशाली, (अहिघ्न्यः) सांप के हनन कर्त्ता पैद्व के।
टिप्पणी
[इदम् = यह तथा उदक (इदम् उदकनाम, निघं० १।१२)। मन्त्र में पैद्व की पहचान के लक्षण दर्शाए हैं, (१) वह भूस्थल पर भी रहता है, (२) जलाशय विहारी भी है, (३) शीघ्रगामी है, (४) शक्तिशाली है, (५) सांपों को मार सकता है। "सायणाचार्य ने विनियोग में कहा है कि केशवाचार्य के अनुसार पैद्वः कीट है, जिसे कि पीस कर नस्यरूप में नासिका में दिया जाता है, सर्प के विष की चिकित्सा में। यह अर्थ मन्त्रोक्त लक्षणों के प्रतिकूल है]।
विषय
सर्प विज्ञान और चिकित्सा।
भावार्थ
(इदम्) यह (पैद्वः) अव नामक ओषध ही (अजायत) ऐसा उत्तम पदार्थ सिद्ध हुआ है। (इयम्) यह ही (अस्य) इसका (परायणम्) परम ओषध है, (वाजिनीवतः) बलवती शक्ति से युक्त (अहिघ्न्यः) सर्प नाशक (अर्वतः) ‘अर्वन्=अश्व’ नामक ओषध के (इमानि) ये (पदा) विशेष जानने योग्य लक्षण हैं।
टिप्पणी
missing
ऋषि | देवता | छन्द | स्वर
अथर्वा ऋषिः। गरुत्मान् तक्षको देवता। २ त्रिपदा यवमध्या गायत्री, ३, ४ पथ्या बृहत्यौ, ८ उष्णिग्गर्भा परा त्रिष्टुप्, १२ भुरिक् गायत्री, १६ त्रिपदा प्रतिष्ठा गायत्री, २१ ककुम्मती, २३ त्रिष्टुप्, २६ बृहती गर्भा ककुम्मती भुरिक् त्रिष्टुप्, १, ५-७, ९, ११, १३-१५, १७-२०, २२, २४, २५ अनुष्टुभः। षड्विंशर्चं सूक्तम्॥
इंग्लिश (4)
Subject
Snake poison cure
Meaning
This is Paidva, born and arisen, this is the path it has gone by. These are the foot-marks of the powerful snake killer Arvan.
Translation
This paidva has grown here. This is its best abode. These are the identification marks of the quick and powerful killer of the serpents.
Translation
This paidva is prominent in its antipoison action. This is the powerful medicine of the poison. These are the signs of recognizing the most powerful serpent-killing Arvan, the Ashva plant.
Translation
Here is this Paidva medicine. It is an excellent thing. It is a nice remedy for the snake-bite. These are the special traits of Paidva, the mighty slayer of the snakes.
संस्कृत (1)
सूचना
कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।
टिप्पणीः
७−(इदम्) इदानीम् (पैद्वः) म० ५। शीघ्रगामी (अजायत) प्रादुरभवत् (इदम्) (अस्य) पुरुषस्य (परायणम्) परा पराक्रमयुक्तम् अयनं मार्गः (इमानि) (अर्वतः) अ० ६।९२।२। ऋ गतौ-वनिप्। शीघ्रगामिनः। विज्ञानिनः (पदा) पदचिह्नानि (अहिघ्न्यः) अघ्न्यादयश्च। उ० ४।११२। अहि+हन हिंसागत्योः-यक्। सुपां सुलुक्०। पा० ७।१।३९। षष्ठ्याः सुः। अहिघ्न्यस्य महाहिंसकस्य सर्पस्य नाशकस्य (वाजिनीवतः) अ० ४।३८।६। अन्नवतीक्रियायुक्तस्य ॥
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