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अथर्ववेद के काण्ड - 20 के सूक्त 92 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 92/ मन्त्र 21
    ऋषिः - पुरुहन्मा देवता - इन्द्रः छन्दः - प्रगाथः सूक्तम् - सूक्त-९२
    53

    आ प॑प्राथ महि॒ना वृष्ण्या॑ वृष॒न्विश्वा॑ शविष्ठ॒ शव॑सा। अ॒स्माँ अ॑व मघव॒न्गोम॑ति व्र॒जे वज्रि॑ञ्चि॒त्राभि॑रू॒तिभिः॑ ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    आ । प॒प्रा॒थ॒ । म॒हि॒ना । वृष्ण्या॑ । वृ॒ष॒न् । विश्वा॑ । श॒वि॒ष्ठ॒ । शव॑सा ॥ अ॒स्मान् । अ॒व॒ । म॒घ॒ऽव॒न् । गोऽम॑ति । व्र॒जे । वज्रि॑न् । चि॒त्राभि॑: । ऊ॒तिऽभि॑: ॥९२.२१॥


    स्वर रहित मन्त्र

    आ पप्राथ महिना वृष्ण्या वृषन्विश्वा शविष्ठ शवसा। अस्माँ अव मघवन्गोमति व्रजे वज्रिञ्चित्राभिरूतिभिः ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    आ । पप्राथ । महिना । वृष्ण्या । वृषन् । विश्वा । शविष्ठ । शवसा ॥ अस्मान् । अव । मघऽवन् । गोऽमति । व्रजे । वज्रिन् । चित्राभि: । ऊतिऽभि: ॥९२.२१॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 20; सूक्त » 92; मन्त्र » 21
    Acknowledgment

    हिन्दी (3)

    विषय

    मन्त्र ४-२१ परमात्मा के गुणों का उपदेश।

    पदार्थ

    (वृषन्) हे शूर ! (शविष्ठ) हे अत्यन्त बली ! [परमात्मन्] (महिना) अपने बड़े (शवसा) बल से (विश्वा) सब (वृष्ण्या) शूर के योग्य बलों को (आ) सब ओर से (पप्राथ) तूने भर दिया है। (मघवन्) हे महाधनी ! (वज्रिन्) हे दण्डधारी ! [शासक परमेश्वर] (गोमति) उत्तम विद्यावाले (व्रजे) मार्ग में (चित्राभिः) विचित्र (ऊतिभिः) रक्षाओं से (अस्मान्) हमें (अव) बचा ॥२१॥

    भावार्थ

    मनुष्यों को चाहिये कि परमात्मा से प्रार्थना करके सब पदार्थों से उपकार लेकर यथावत् पालन करें ॥२१॥

    टिप्पणी

    मन्त्र २०, २१ आचुके हैं-अ० २०।८१।१, २ ॥ २०, २१−व्याख्यातौ-अ० २०।८१।१, २ ॥

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    विषय

    देखो व्याख्या अथर्व० २०.८१.१-२ पर।

    पदार्थ

    प्रभु का स्तवन करनेवाला यह 'प्रगाथ' अगले सूक्त में १-३ तक ऋषि है। स्तवन के द्वारा दिव्यगुणों को जन्म देनेवाली 'देवजामय' ४-८ तक का ऋषि है -

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    भाषार्थ

    देखो—मन्त्र संख्या २०.८१.१।

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Brhaspati Devata

    Meaning

    O lord of the thunderbolt, master and controller of world’s wealth, honour and power, most potent and lord of showers of generosity, with your generous and creative power and grandeur you pervade the universe. Pray protect, guide and promote us by your various and wondrous modes of protection and progress in our search for development of lands and cows, knowledge, language and culture.

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    Translation

    O giver of happiness, O powerfully strong one, O worshipable one, you have expaneded all the activities of bravity. O Lord, you guard us in attaining the stall of cows or in treading the path of learned devotees through your wondrous protective powers.

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    Translation

    O giver of happiness, O powerfully strong one, O worshipable one, you have expanded all the activities of bravity. O Lord, you guard us in attaining the stall of cows or in treading the path of learned devotees through your wondrous protective powers.

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    Translation

    O Mighty Lord of Destruction, may our praise-songs please Thee Let this invest wealth of food, knowledge and devotion and destroy those who hate God, Veda and Vedic learned.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    मन्त्र २०, २१ आचुके हैं-अ० २०।८१।१, २ ॥ २०, २१−व्याख्यातौ-अ० २०।८१।१, २ ॥

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