ऋग्वेद - मण्डल 9/ सूक्त 64/ मन्त्र 4
असृ॑क्षत॒ प्र वा॒जिनो॑ ग॒व्या सोमा॑सो अश्व॒या । शु॒क्रासो॑ वीर॒याशव॑: ॥
स्वर सहित पद पाठअसृ॑क्षत । प्र । वा॒जिनः॑ । ग॒व्या । सोमा॑सः । अ॒श्व॒ऽया । शु॒क्रासः॑ । वी॒र॒ऽया । आ॒शवः॑ ॥
स्वर रहित मन्त्र
असृक्षत प्र वाजिनो गव्या सोमासो अश्वया । शुक्रासो वीरयाशव: ॥
स्वर रहित पद पाठअसृक्षत । प्र । वाजिनः । गव्या । सोमासः । अश्वऽया । शुक्रासः । वीरऽया । आशवः ॥ ९.६४.४
ऋग्वेद - मण्डल » 9; सूक्त » 64; मन्त्र » 4
अष्टक » 7; अध्याय » 1; वर्ग » 36; मन्त्र » 4
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अष्टक » 7; अध्याय » 1; वर्ग » 36; मन्त्र » 4
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भाष्य भाग
संस्कृत (1)
पदार्थः
(सोमासः) सौम्यस्वभाववान् (वाजिनः) बलरूपः (अश्वया) गतिशीलस्तथा (गव्या) प्रकाशरूपः (शुक्रासः) ज्ञानस्वरूपः (वीरया) वीरोत्पादकः पुरुषः (आशवः) गतिशीलं परमात्मानमुपासकाः (प्रासृक्षत) उपासते ॥४॥
हिन्दी (3)
पदार्थ
(सोमासः) सौम्य स्वभाववाला (वाजिनः) बलरूप (अश्वया) गतिशील तथा (गव्या) प्रकाशस्वरूप (शुक्रासः) ज्ञानस्वरूप (वीरया) वीरों को उत्पन्न करनेवाले (आशवः) गतिशील परमात्मा को उपासक लोग (प्रासृक्षत) अपना उपास्य बनाते हैं ॥४॥
भावार्थ
परमात्मा उपदेश करते हैं कि हे मनुष्यों ! तुम लोग उक्त गुणसम्पन्न परमात्मा को अपना उपास्य बनाओ ॥४॥
विषय
गव्या-अश्वया-वीरया
पदार्थ
[१] (प्र वाजिन:) = प्रकृष्ट शक्ति के कारणभूत, (शुक्रासः) = ज्ञानदीप्ति को उत्पन्न करनेवाले (आशवः) = शीघ्रता से कार्यों में व्याप्त होनेवाले (सोमासः) = सोमकण (असृक्षत) = उत्पन्न किये जाते हैं । [२] ये सोमकण (गव्या) = उत्तम ज्ञानेन्द्रियों की कामना से (अश्वया) = उत्तम कर्मेन्द्रियों की कामना से तथा (वीरया) = उत्तम सन्तानों व वीरत्व की कामना से उत्पन्न किये जाते हैं।
भावार्थ
भावार्थ- सोम हमें शक्ति, ज्ञानदीप्ति व स्फूर्ति को प्राप्त करानेवाले हैं। इनके रक्षण से उत्तम ज्ञानेन्द्रियों, उत्तम कर्मेन्द्रियों तथा वीर सन्तानों की प्राप्ति होती है।
विषय
प्रमुख पुरुषों को ज्ञान, बल, धन आदि की प्राप्तवर्थ नियुक्ति।
भावार्थ
(वाजिनः) बलवान्, बुद्धिमान्, ज्ञानवान् पुरुषों को (गव्या) गौ, वाणी को प्राप्त करने और अन्यों को देने के लिये (प्र असृक्षत) प्रमुख बनाया जावे। (सोमासः अश्वया) बलवान् और धनवान् पुरुषों को (अश्वया) अश्व, सैन्य, राष्ट्र के प्राप्त करने के लिये (प्र असृक्षत) प्रमुख बनाया जावे और (वीरया) वीर पुत्र उत्पन्न करने के लिये (शुक्रासः) वीर्यवान् पुरुषों को तैयार किया जावे।
टिप्पणी
missing
ऋषि | देवता | छन्द | स्वर
काश्यप ऋषिः। पवमानः सोमो देवता॥ छन्द:– १, ३, ४, ७, १२, १३, १५, १७, १९, २२, २४, २६ गायत्री। २, ५, ६, ८–११, १४, १६, २०, २३, २५, २९ निचृद् गायत्री। १८, २१, २७, २८ विराड् गायत्री। ३० यवमध्या गायत्री ॥ त्रिंशदृचं सूक्तम्॥
इंग्लिश (1)
Meaning
Vibrant heroes blest with the soma spirit of peace, progress and brilliance, pure and potent, inspired with ambition for lands, cows and culture, horses, advancement and achievement, and advancement of the brave generations of humanity move forward with the spirit of generous creativity.
मराठी (1)
भावार्थ
परमात्मा उपदेश करतो की हे माणसांनो! तुम्ही सौम्य स्वभाव, बलवान, ज्ञानस्वरूप, प्रकाशस्वरूप इत्यादी गुणसंपन्न परमेश्वराला आपले उपास्य बनवा. ॥४॥
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