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अथर्ववेद के काण्ड - 10 के सूक्त 1 के मन्त्र
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  • अथर्ववेद - काण्ड {"suktas":143,"mantras":958,"kand_no":20}/ सूक्त 1/ मन्त्र 23
    ऋषिः - प्रत्यङ्गिरसः देवता - कृत्यादूषणम् छन्दः - त्रिपदा भुरिग्विषमा गायत्री सूक्तम् - कृत्यादूषण सूक्त
    78

    भ॑वाश॒र्वाव॑स्यतां पाप॒कृते॑ कृत्या॒कृते॑। दु॒ष्कृते॑ वि॒द्युतं॑ देवहे॒तिम् ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    भ॒वा॒श॒र्वौ । अ॒स्य॒ता॒म् । पा॒प॒ऽकृते॑ । कृ॒त्या॒ऽकृते॑ । दु॒:ऽकृते॑ । वि॒ऽद्युत॑म् । दे॒व॒ऽहे॒तिम् ॥१.२३॥


    स्वर रहित मन्त्र

    भवाशर्वावस्यतां पापकृते कृत्याकृते। दुष्कृते विद्युतं देवहेतिम् ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    भवाशर्वौ । अस्यताम् । पापऽकृते । कृत्याऽकृते । दु:ऽकृते । विऽद्युतम् । देवऽहेतिम् ॥१.२३॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 10; सूक्त » 1; मन्त्र » 23
    Acknowledgment

    हिन्दी (4)

    विषय

    राजा के कर्तव्य दण्ड का उपदेश।

    पदार्थ

    (भवाशर्वौ) सुख देनेवाले और दुःख नाश करनेवाले [राजा और मन्त्री दोनों] (पापकृते) पाप करनेवाले (कृत्याकृते) हिंसा करनेवाले और (दुष्कृते) दुष्कर्मी पुरुष के लिये (देवहेतिम्) विद्वानों के वज्र (विद्युतम्) बिजुली [के शस्त्र] को (अस्यताम्) गिरावें ॥२३॥

    भावार्थ

    राजा और मन्त्री दुष्टों को यथावत् दण्ड देकर प्रजा में शान्ति रक्खें ॥२३॥

    टिप्पणी

    २३−(भवाशर्वौ) अ० ८।२।७। सुखस्य भावयिता कर्ता भवो राजा, दुःखस्य शरिता नाशकः शर्वो मन्त्री च तौ (अस्यताम्) प्रेरयताम् (पापकृते) पापकारिणे (कृत्याकृते) म० २। हिंसाकारिणे (दुष्कृते) दुष्कर्मिणे (विद्युतम्) अशनिरूपं शस्त्रम् (देवहेतिम्) विदुषां वज्रम् ॥

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    विषय

    पापकृत, कृत्याकृत, दुष्कृत्

    पदार्थ

    १. संसार को उत्पन्न करनेवाले प्रभु'भव' हैं [भूः], संसार का संहार [प्रलय] करनेवाले प्रभु 'शर्व' हैं। (भवाशर्वौं) = उत्पादक व संहारक प्रभु (पापकृते) = पाप करनेवाले के लिए,(कृत्याकते) = औरों का छेदन-भेदन करनेवाले के लिए तथा (दुष्कृते) = अशुभ कर्मों को करनेवाले के लिए (देवहेतिम्) = देवों के वनभूत (विद्युतम्) = विद्युत् को (अस्यताम्) = फेंकनेवाले हों।

     

    भावार्थ

    पापकृत, कृत्याकृत, दुष्कृत् लोग उत्पादक व संहारक प्रभु के द्वारा फेंकी गई विद्युत् के शिकार हों। ये लोग आधिदैविक आपत्तियों के द्वारा नष्ट हो जाएँ।

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    भाषार्थ

    (भवाशर्वौ) भव और शर्व (पापकृते) पापकर्म करने वाले, (दुष्कृते) दुष्कर्मी, (कृत्याकृते) हिंस्रसेना के रचयिता के लिये (देवहेतिम्) देवों के अस्त्र (विद्युतम्) विद्युत् को (अस्यताम्) फेंके।

    टिप्पणी

    [भव= नागरिक प्रजा का अध्यक्ष। शर्वः = सैनिक प्रजा का अध्यक्ष; शृणातीति शर्वः; शॄहिंसायाम् (क्र्यादिः)। जब आक्रमण करने वाली सेना के साथ युद्ध उपस्थित हो जाय तब भव और शर्व परस्पर सहमति से उस पर वैद्युतास्त्र प्रहार करें। सेना की रचना युद्धार्थ, पापकर्म है और दुष्कर्म है। देवहेतिः= देवाः विजिगीषवः सैनिकाः [दिवु क्रीडाविजिगीषा...... “दिवादिः”, भूतस्य पतयो वा (मन्त्र २२)] तेषां हेतिः, अस्त्रम्। विद्युत् = वैद्युतास्त्र (मन्त्र- २१)। निज प्रजा में विप्लव-विद्रोह की सम्भावना में, या स्वरक्षा में सेना का निर्माण न पापकर्म है, न दुष्कर्म]।

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    विषय

    घातक प्रयोगों का दमन।

    भावार्थ

    (भवाशर्वौ) भव और शर्व दोनों (पापकृते) पापाचरण करने वाले (कृत्याकृते) दूसरे पर घातक प्रयोग करने वाले (दुष्कृते) दुष्ट या दुखदायी काम करने वाले पर (देवहेतिम्) दिव्य आयुधरूप (विद्युतम्) बिजुली के अस्त्र को (स्यताम्) फेंकें।

    टिप्पणी

    (प्र०) ‘पाप कृत्वने’ इति पैप्प० सं०।

    ऋषि | देवता | छन्द | स्वर

    प्रत्यंगिरसो ऋषिः। कृत्यादूषणं देवता। १ महाबृहती, २ विराण्नामगायत्री, ९ पथ्यापंक्तिः, १२ पंक्तिः, १३ उरोबृहती, १५ विराड् जगती, १७ प्रस्तारपंक्तिः, २० विराट् प्रस्तारपंक्तिः, १६, १८ त्रिष्टुभौ, १९ चतुष्पदा जगती, २२ एकावसाना द्विपदाआर्ची उष्णिक्, २३ त्रिपदा भुरिग् विषमगायत्री, २४ प्रस्तारपंक्तिः, २८ त्रिपदा गायत्री, २९ ज्योतिष्मती जगती, ३२ द्व्यनुष्टुब्गर्भा पञ्चपदा जगती, ३-११, १४, २२, २१, २५-२७, ३०, ३१ अनुष्टुभः। द्वात्रिंशदृचं सूक्तम्॥

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    इंग्लिश (4)

    Subject

    Countering Evil Designs

    Meaning

    May Bhava and Sharva, ruling powers of peace and progress, and destroyers of evil, injustice and mischief, focus their divine powers of peace, protection and justice upon the people, and strike their lazer beams of punishment upon evil doers, mischief makers and destructive elements of society.

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    Translation

    May: the Lord of existence (bhava) and the Lord of destruction (Sarva) hurl the blazing divine weapon at the sinner, the maker of the harmful design, the wicked one. (for Bhava and Sarva, see AV IV.28.1)

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    Translation

    May the Bhava and Sharva the two forms of fire cast their flash of electricity which is the most effective weapon of the physical forces, against the evil-doers, bad tool-appliers and the men of evil designs.

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    Translation

    May the king and the chief minister cast electrical missile, the weapon of the learned, against the sinner, who is violent and satanic.

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    संस्कृत (1)

    सूचना

    कृपया अस्य मन्त्रस्यार्थम् आर्य(हिन्दी)भाष्ये पश्यत।

    टिप्पणीः

    २३−(भवाशर्वौ) अ० ८।२।७। सुखस्य भावयिता कर्ता भवो राजा, दुःखस्य शरिता नाशकः शर्वो मन्त्री च तौ (अस्यताम्) प्रेरयताम् (पापकृते) पापकारिणे (कृत्याकृते) म० २। हिंसाकारिणे (दुष्कृते) दुष्कर्मिणे (विद्युतम्) अशनिरूपं शस्त्रम् (देवहेतिम्) विदुषां वज्रम् ॥

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