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  • अथर्ववेद - काण्ड 12/ सूक्त 5/ मन्त्र 66
    सूक्त - अथर्वाचार्यः देवता - ब्रह्मगवी छन्दः - प्राजापत्यानुष्टुप् सूक्तम् - ब्रह्मगवी सूक्त

    वज्रे॑ण श॒तप॑र्वणा ती॒क्ष्णेन॑ क्षु॒रभृ॑ष्टिना ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    वज्रे॑ण । श॒तऽप॑र्वणा । ती॒क्ष्णेन॑ । क्षु॒रऽभृ॑ष्टिना ॥११.५॥


    स्वर रहित मन्त्र

    वज्रेण शतपर्वणा तीक्ष्णेन क्षुरभृष्टिना ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    वज्रेण । शतऽपर्वणा । तीक्ष्णेन । क्षुरऽभृष्टिना ॥११.५॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 12; सूक्त » 5; मन्त्र » 66
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