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अथर्ववेद के काण्ड - 13 के सूक्त 2 के मन्त्र

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  • अथर्ववेद - काण्ड 13/ सूक्त 2/ मन्त्र 37
    ऋषि: - ब्रह्मा देवता - रोहितः, आदित्यः, अध्यात्मम् छन्दः - पञ्चपदा विराड्जगती सूक्तम् - अध्यात्म सूक्त
    27

    दि॒वस्पृ॒ष्ठे धाव॑मानं सुप॒र्णमदि॑त्याः पु॒त्रं ना॒थका॑म॒ उप॑ यामि भी॒तः। स नः॑ सूर्य॒ प्र ति॑र दी॒र्घमायु॒र्मा रि॑षाम सुम॒तौ ते॑ स्याम ॥

    स्वर सहित पद पाठ

    दि॒व: । पृ॒ष्ठे । धाव॑मानम्‌ । सु॒ऽप॒र्णम् । अदि॑त्या: । पु॒त्रम् । ना॒थऽका॑म: । उप॑ । या॒मि॒ । भी॒त: । स: । न॒: । सू॒र्य॒ । प्र । ति॒र॒ । दी॒र्घम् । आयु॑: । मा । रि॒षा॒म॒ । सु॒ऽम॒तौ । ते॒ । स्या॒म॒ ॥२.३७॥


    स्वर रहित मन्त्र

    दिवस्पृष्ठे धावमानं सुपर्णमदित्याः पुत्रं नाथकाम उप यामि भीतः। स नः सूर्य प्र तिर दीर्घमायुर्मा रिषाम सुमतौ ते स्याम ॥

    स्वर रहित पद पाठ

    दिव: । पृष्ठे । धावमानम्‌ । सुऽपर्णम् । अदित्या: । पुत्रम् । नाथऽकाम: । उप । यामि । भीत: । स: । न: । सूर्य । प्र । तिर । दीर्घम् । आयु: । मा । रिषाम । सुऽमतौ । ते । स्याम ॥२.३७॥

    अथर्ववेद - काण्ड » 13; सूक्त » 2; मन्त्र » 37
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    पदार्थ -
    (नाथकामः) नाथ [ईश्वर] को चाहनेवाला, (भीतः) डरा हुआ मैं (दिवः) आकाश की (पृष्ठे) पीठ पर (धावमानम्) दौड़ते हुए, (सुपर्णम्) बड़े पालनेवाले, (अदित्याः) अखण्ड वेदवाणी के (पुत्रम्) शोधनेवाले [परमेश्वर] को (उप) आदर से (यामि) पहुँचता हूँ। (सः) सो तू, (सूर्य) हे सर्वप्रेरक ! [जगदीश्वर] (नः) हमारे लिये (दीर्घम्) दीर्घ (आयुः) जीवन समय को (प्र तिर) बढ़ा दे, (मा रिषाम) हम दुखी न होवें, (ते) तेरी (सुमतौ) सुमति में (स्याम) हम रहें ॥३७॥

    भावार्थ - मनुष्यों को योग्य है कि आकाश को भी वश में रखनेवाले, सर्वपालक, शुद्ध वेदवाणी के देनेवाले परमेश्वर की आज्ञा में रहकर अपने जीवन को यशस्वी बनावें और विघ्नों को हटा कर सदा आनन्द से रहें ॥३७॥


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    Meaning -
    Smothered by the pressures of life around, yearning for fulfilment of my life’s mission and purpose, I come and pray to the Sun, self-refulgent child of Imperishable mother Eternity, flying high in space on top of heaven like a celestial Bird of infinite wings of will and action. May the Sun give us long life and good health, may we never come to harm and injury, and may we, O Lord, ever enjoy your love and good will.


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